नीट परीक्षा से पूर्व टेलीग्राम पर पाबंदी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी
शफीक
- 16 Jun 2026, 09:29 PM
- Updated: 09:29 PM
नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) की पुन: परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर कुछ समय के लिए पाबंदियां लगाने से सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।
कुछ लोग इस कदम के असरदार होने पर सवाल उठा रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग गलत जानकारी और प्रश्नपत्र लीक के झूठे दावों को रोकने के लिए इसका समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि ऐसी बातें विद्यार्थियों में भ्रम पैदा कर सकती हैं।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा 'एक्स' पर किये गये पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, खुद को 'एथिकल हैकर' बताने वाले निसर्ग अधिकारी ने दावा किया कि लोग टेलीग्राम पर लगाई गई किसी भी रोक को आसानी से धता बता सकते हैं।
निसर्ग अधिकारी ने ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम' (ओएसएम) में कथित सुरक्षा खामियों का खुलासा किया था।
उन्होंने 'एक्स' पर कहा, ''हम प्रश्नपत्र लीक को रोक नहीं पाते हैं, इसलिए आखिर में टेलीग्राम पर ही रोक लगा देते हैं। टेलीग्राम को पूरी तरह प्रतिबंधित करना मुमकिन ही नहीं है; इसे इस तरह से बनाया गया है कि लोग आसानी से प्रॉक्सी और दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करके इसे इस्तेमाल कर सकते हैं।''
निसर्ग अधिकारी ने हाल में 12वीं की परीक्षा पास की है। वह अब आईआईटी (कानपुर) के साइबर सिक्योरिटी और साइबर डिफेंस इनोवेशन सेंटर के सीथ्रीआई हब में अनुबंध पर ओएसआईएनटी और 'थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर' के तौर पर शामिल हुए हैं।
इस कदम की आलोचना का जवाब देते हुए आईआईटी-कानपुर के निदेशक मनींद्र अग्रवाल ने कहा कि चिंता सिर्फ़ लीक हुए प्रश्नपत्र को साझा करने की नहीं थी, बल्कि लीक के झूठे दावों के फैलने की थी, जो असली लग सकते हैं और अभ्यर्थियों के बीच भ्रम पैदा कर सकते हैं।
अग्रवाल ने 'एक्स' पर लिखा, ''उन्हें (निसर्ग) बिठाकर समझाना होगा। टेलीग्राम चैनल के साथ समस्या लीक प्रश्नपत्र साझा करने की नहीं है, ऐसा करने के कई और तरीके भी हैं, बल्कि इसका इस्तेमाल लीक की ऐसी झूठी खबरें फैलाने के लिए किया जा सकता है जो असली लगती हैं। जेईई एडवांस्ड के दौरान किसी ने ऐसा किया था। इससे बेवजह भ्रम पैदा होता है।''
ओएसएम विवाद के दौरान चर्चा में आए 18 साल के छात्र सार्थक सिद्धांत ने भी इन पाबंदियों की वजह पर सवाल उठाए।
सिद्धांत उन विद्यार्थियों में शामिल हैं जो सीबीएसई के ओएसएम व्यवस्था से परेशान थे। उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में ओएसएम प्रक्रिया के लिए संबंधित कंपनियों को चुनने की निविदा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की ओर भी इशारा किया था।
उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, ''सिर्फ इसलिए कि किसी संवाद माध्यमों में गलत जानकारी हो सकती है, हमने उसे बंद करने का फैसला कर लिया है।''
उन्होंने पूछा,''क्या व्हाट्सअप पर गलत जानकारी नहीं फैलती? क्या भारतीय प्रेस में ऐसा नहीं होता? पूरे टेलीग्राम को बंद करने के पीछे क्या तर्क है?''
अग्रवाल की बातों का ज़िक्र करते हुए सिद्धांत ने सवाल किया कि क्या ''ट्विटर (एक्स) को इसलिए बंद कर देना चाहिए क्योंकि वहां गलत जानकारी फैलाई जा रही है?''
उन्होंने कहा, ''तो फिर हम विरोध करने के हर ज़रिया को ही बंद कर देते हैं क्योंकि आख़िरकार विरोध करना भी तो गलत जानकारी ही है? ''
आलोचना का जवाब देते हुए अग्रवाल ने कहा, ''अगर आप व्हाट्सअप पर कोई पोस्ट बदलते हैं, तो यह दिखता है कि आपने उसमें कब संपादन किया था। इसलिए यह कोई समस्या नहीं है।''
सिद्धांत ने जब इस फ़र्क के पीछे की 'वजह' पर सवाल उठाया, तो अग्रवाल ने दावा किया कि टेलीग्राम पर 'बिना कोई निशान छोड़े फ़ेक लीक'' किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, '' टेलीग्राम में एक खास विशेषता है, जिससे पोस्ट को संपादित करने पर भी यह पता नहीं चलता कि उसमें कोई बदलाव किया गया है। यह खतरनाक है। किसी दूसरे बड़े सोशल मीडिया मंच पर ऐसी विशेषता नहीं है। कोई यह तर्क दे सकता है कि प्रतिबंध लगाना सही विचार नहीं है। लेकिन प्रतिबंध के संदर्भ को सही ढंग से समझने की ज़रूरत है।''
नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले, सरकार ने मंगलवार को भारत में टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप के इस्तेमाल पर 22 जून तक के लिए अस्थायी रोक लगा दी। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का कहना है कि यह कदम नकल कराने वाले रैकेट और गलत जानकारी से निपटने के लिए उठाया गया है।
अब यह परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी।
इस बीच, 'इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन' (आईएफएफ) ने टेलीग्राम पर सरकार की पाबंदियों की आलोचना करते हुए इस कदम को परीक्षा में धोखाधड़ी के मामले में एक 'बैंड-एड' समाधान और ''ज़रूरत से ज़्यादा'' कड़ी प्रतिक्रिया बताया।
भाषा राजकुमार शफीक
शफीक
1606 2129 दिल्ली