विश्व कप: फुटबॉल में खिलाड़ी की कद-काठी कितनी कारगर
वैभव
- 22 Jun 2026, 01:38 PM
- Updated: 01:38 PM
एडिलेड (ऑस्ट्रेलिया), 22 जून (द कन्वरसेशन) खेलों की दुनिया एक तरह से 'डार्विन के सिद्धांत' पर चलती है। जिन खिलाड़ियों में इसके लिए जरूरी हुनर और दम-खम होता है, उन्हें चुन लिया जाता है और जिनमें ये कौशल नहीं होता, वे पीछे छूट जाते हैं।
केवल प्रतिभा, जुझारूपन, सहनशक्ति और ताकत ही नहीं, बल्कि शरीर की बनावट और कद-काठी भी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, ''मॉर्फोलॉजिकल ऑप्टिमाइजेशन के नियम'' का अर्थ है कि जिस खिलाड़ी का शरीर उसके खेल की जरूरत के अनुकूल होता है, उसके सफल होने की संभावना अधिक रहती है। हाल में नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन (एनबीए) फाइनल में सैन एंटोनियो स्पर्स के 224 सेंटीमीटर (7.3 फुट) कद वाले खिलाड़ी विक्टर वेम्बान्यामा इसका उदाहरण रहे हैं।
लेकिन फुटबॉल खिलाड़ियों को लेकर स्थिति क्या है? क्या शीर्ष स्तर के फुटबॉलर के लिए कोई आदर्श कद होता है?
फुटबॉलर के लिए सही कद का पता लगाना
विश्व कप में खेलने वाले खिलाड़ियों का कद काफी अलग-अलग होता है। अर्जेंटीना के डिएगो माराडोना का कद 165 सेंटीमीटर (5.4 फुट) था, जबकि बचपन में 'ग्रोथ हार्मोन' की कमी से जूझने वाले अर्जेंटीना के लियोनेल मेस्सी का कद 170 सेंटीमीटर (5.5 फुट) है। ब्राजील के पेले का कद 173 सेंटीमीटर (5.6 फुट), फ्रांस के जिनेदिन जिदान का 185 सेंटीमीटर (छह फुट) और नॉर्वे के एरलिंग ब्रॉट हालांड का कद 195 सेंटीमीटर (6.3 फुट) है।
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को दिए जाने वाले 'फीफा बैलन डी'ओर' पुरस्कार के विजेताओं के कद में भी काफी विविधता देखने को मिलती है। मेस्सी का कद जहां 170 सेंटीमीटर है, वहीं रोड्री के नाम से लोकप्रिय स्पेन के रोड्रिगो हर्नांडेज कास्कांते का शरीर 190 सेंटीमीटर (6.2 फुट) ऊंचा है।
टीम के खिलाड़ियों का औसत कद और उसके प्रदर्शन के बीच भी कोई सीधा संबंध देखने को नहीं मिला है।
अर्जेंटीना, स्पेन और ब्राजील जैसी विश्व कप विजेता टीम वर्षों से अपेक्षाकृत कम कद वाले खिलाड़ियों की टीम में शामिल रही हैं। इसलिए फुटबॉलर बनने का सपना देखने वाले बच्चों के माता-पिता को उनके कद को लेकर अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है।
हालांकि, विश्व कप टीम के खिलाड़ियों के कद से जुड़ी एक दिलचस्प बात जरूर सामने आई है। लगभग सभी टीम के खिलाड़ियों का औसत कद एक-दूसरे से काफी मिलता-जुलता है।
इस वर्ष विश्व कप में भाग लेने वाली 48 टीम के अधिकांश सदस्यों का औसत कद 180 से 185 सेंटीमीटर के बीच है।
खबरों के अनुसार, औसत 187 सेंटीमीटर (6.1 फुट) कद के साथ टीम बोस्निया और नॉर्वे सबसे आगे है, जबकि ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाड़ियों का औसत कद 183 सेंटीमीटर (छह फुट) है और 178 सेंटीमीटर (5.8 फुट) के साथ इस मामले में सऊदी अरब की टीम सबसे पीछे है।
औसतन देखा जाए तो फुटबॉल खिलाड़ी अपने देश के समान आयु वर्ग के सामान्य पुरुषों की तुलना में अधिक लंबे होते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जिन देशों की सामान्य आबादी का औसत कद अपेक्षाकृत कम होता है, वहां राष्ट्रीय टीम और आम आबादी के कद की लंबाई के बीच अंतर अधिक होता है। वहीं लंबे कद वाले देशों में यह अंतर कम होता है।
आंकड़े संकेत देते हैं कि लगभग हर टीम ऐसे खिलाड़ियों की तलाश में रहती है जिनका कद 180 से 185 सेंटीमीटर के बीच हो। संभवतः यही फुटबॉल खिलाड़ी के लिए सबसे उपयुक्त कद माना जा सकता है।
यह समझने के लिए कि ऐसा क्यों है, खेल की प्रकृति को समझना जरूरी है।
अलग-अलग भूमिकाओं के लिए अलग कद
फुटबॉल में खिलाड़ी का कद काफी हद तक उसकी भूमिका पर निर्भर करता है।
गोलकीपर कद में सबसे लंबा होता है। विश्व कप में गोलकीपर का औसत कद लगभग 189 सेंटीमीटर होता है, क्योंकि उन्हें गोल बचाने के लिए अधिक दायरे तक पहुंचने की जरूरत होती है।
ऑस्ट्रेलिया की ओर से विश्व कप खेलने वाले सबसे लंबे खिलाड़ी गोलकीपर जेल्को कालाच थे, जिनका कद 202 सेंटीमीटर था। एक समय तो यह चर्चा भी थी कि गोलकीपर की बढ़ती लंबाई के कारण गोलपोस्ट का आकार बढ़ा दिया जाए।
डिफेंडरों का मुख्य काम आक्रमणकारी खिलाड़ियों को रोकना और हवा में बॉल (हैडर से) के लिए मुकाबला करना होता है। इसलिए उनका औसत कद भी लगभग 183 सेंटीमीटर होता है।
मेस्सी ने अपने करियर में अब तक 30 से कुछ अधिक हैडर गोल किए हैं, जबकि कद में उनसे काफी लंबे क्रिस्टियानो रोनाल्डो 150 से अधिक हैडर गोल कर चुके हैं। फ्री-किक के दौरान बनने वाली 'डिफेंसिव वॉल' में भी लंबे कद के खिलाड़ी अधिक प्रभावी साबित होते हैं।
मिडफील्डर और फॉरवर्ड जैसे आक्रामक खिलाड़ियों को तेज गति और फुर्ती की जरूरत होती है। इसलिए उनका कद आमतौर पर 175 से 180 सेंटीमीटर के बीच यानी थोड़ा कम रहता है। फुटबॉल इतिहास के दो महानतम 'अटैकर' खिलाड़ी माराडोना (165 सेंटीमीटर) और मेस्सी (170 सेंटीमीटर) भी अपेक्षाकृत छोटे कद के रहे हैं।
ऐसा लगता है कि विश्व कप स्तर की टीम को कुछ ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत होती है जो हैडर कर सकें, 'डिफेंसिव वॉल' का हिस्सा बन सकें और विरोधियों को प्रभावी ढंग से रोक सकें।
जब एक टीम इस तरह के खिलाड़ियों को चुनती है, तो प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए दूसरी टीमों को भी समान कद-काठी वाले खिलाड़ियों का चयन करना पड़ता है। इसे एक तरह की ''शारीरिक प्रतिस्पर्धा'' कहा जा सकता है। मेक्सिको और इक्वाडोर जैसे अपेक्षाकृत कम औसत कद वाले देशों के लिए यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
आखिर निष्कर्ष क्या है?
फुटबॉल में खिलाड़ी का कद महत्वपूर्ण है, लेकिन यह उतना मूल्यवान नहीं है जितना गेंद पर नियंत्रण, सहनशक्ति, फुर्ती, खेल को परखने की क्षमता और मैदान पर खिलाड़ियों की स्थिति को समझने की योग्यता। इन गुरों का खिलाड़ी के कद से बहुत कम संबंध होता है।
यही कारण है कि फुटबॉल में बहुत अधिक लंबे खिलाड़ी कम ही दिखाई देते हैं।
सामान्य आबादी में अच्छी कद-काठी वाले पुरुषों की संख्या कम होती है और स्वाभाविक रूप से ऐसे खिलाड़ियों की संख्या भी कम होगी जिनमें असाधारण फुटबॉल कौशल हो।
विश्व कप कौन जीतेगा, इसका अनुमान लगाना आसान नहीं है। लेकिन इतना भरोसे के साथ कहा जा सकता है कि विजेता टीम ऐसे युवा खिलाड़ियों की होगी जिनका कद औसत से कुछ अधिक होगा। और शायद वह टीम फ्रांस भी हो सकती है।
द कन्वरसेशन खारी वैभव
वैभव
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