बंगाल बजट: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विकास और विरासत का बजट बताया
नरेश
- 22 Jun 2026, 05:32 PM
- Updated: 05:32 PM
कोलकाता, 22 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के पहले बजट को विकास और विरासत का बजट बताते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि इसमें कानून-व्यवस्था से लेकर रोजगार पैदा करने तक, हर क्षेत्र को शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि पैसों की कमी और कर्ज के बोझ के बावजूद, पश्चिम बंगाल विधानसभा में 4.38 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश किया गया है।
वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किए जाने के बाद, वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता के साथ संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा, ''यह 'विकास और विरासत' का बजट है।''
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने वित्त वर्ष के बचे हुए आठ महीनों के लिए ही बजट पेश किया है क्योंकि अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों के कारण ममता बनर्जी नीत तत्कालीन सरकार ने 2026-27 के शुरुआती चार महीनों के लिए 'लेखानुदान' पेश किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''मैं वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता द्वारा पेश किये गए बजट का स्वागत करता हूं। हमारी सरकार के कार्यभार संभालने के महज डेढ़ महीने के भीतर ही जिस तरह से एक समावेशी बजट पेश किया गया है, वह सराहनीय है।''
उन्होंने कहा कि बजट में, राज्य के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए हैं, जिनमें 20,000 पुलिसकर्मियों की भर्ती और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 112 हेल्पलाइन सेवा व उससे जुड़ी सेवाओं की शुरुआत शामिल है।
उन्होंने कहा, ''बुनियादी ढांचे के विकास, उद्योग और कृषि क्षेत्र पर विशेष रूप से जोर दिया गया है।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में एक लाख नयी सरकारी नौकरियां दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियुक्ति समितियों में किसी भी राजनीतिक व्यक्ति को शामिल नहीं किया जाएगा।
शुभेंदु ने कहा, ''हम भर्ती प्रक्रिया में यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) के तरीके का पालन करेंगे। सरकारी नौकरियों में गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं होगी।''
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) को धीरे-धीरे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के 'डीए' के बराबर करने का वादा भी किया।
हालांकि, विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी ने कहा कि 2026-27 के बजट प्रस्तावों में बुनियादी ढांचे के विकास को अहम जगह दी गई है, लेकिन इसे हासिल करने की रुपरेखा स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने कहा कि बजट में निश्चित रूप से कुछ स्वागत योग्य प्रस्ताव हैं, जैसे चाय बागानों द्वारा वाणिज्यिक काम के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जमीन की मात्रा को पहले के 30 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत करना।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के रिताब्रता बनर्जी गुट के विधायक अखरुज्जमां ने कहा कि अल्पसंख्यक कार्य विभाग के लिए बजट आवंटन में पिछले साल के बजट की तुलना में आधे से भी अधिक कटौती कर दी गई है।
इसे ''सरकार का एक समुदाय विशेष के प्रति सौतेलेपन वाला रवैया'' बताते हुए उन्होंने कहा कि बजट में ''सबका साथ, सबका विकास'' की झलक नहीं मिलती है।
इस बीच, राज्य के खेल और युवा मामलों के मंत्री इंद्रनील खान ने बजट को ''अभूतपूर्व'' बताया। उन्होंने कहा कि खेल और युवाओं के कल्याण के लिए घोषित उपायों से खेल अवसंरचना को बढ़ावा मिलेगा, खिलाड़ियों को मदद मिलेगी और पूरे राज्य में युवाओं के लिए अवसर बढ़ेंगे।
बजट में खेल से जुड़े मुख्य प्रस्तावों में 150 करोड़ रुपये की लागत से एक खेल विश्वविद्यालय की स्थापना भी शामिल है।
राज्य सरकार ने उत्तर बंगाल में दो 'इनडोर' और 'आउटडोर' स्टेडियम बनाने का प्रस्ताव किया है और कोलकाता के रवींद्र सरोवर स्टेडियम सहित मौजूदा खेल सुविधाओं के नवीनीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
वित्त मंत्री दासगुप्ता ने यह भी घोषणा की कि केंद्र की 'खेलो इंडिया' योजना के तहत हर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से 'मिनी इनडोर स्टेडियम' बनाए जाएंगे।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कृत करने के लिए 50 करोड़ रुपये का एक अलग कोष भी बनाया जाएगा।
बजट में युवाओं के लिए और उच्च शिक्षा हासिल करने में होने वाले खर्च से जूझ रहे छात्रों की मदद के लिए भी पहल की गई है।
नयी घोषित 'भरोसा योजना' के तहत, 21 से 45 साल की उम्र के बेरोजगार स्नातक युवाओं को हर महीने 3,000 रुपये का भत्ता मिलेगा, जबकि इसी उम्र के बेरोजगार अंतर-स्नातक युवाओं को हर महीने 2,000 रुपये मिलेंगे। यह लाभ उन परिवारों के लोगों को मिलेगा जिनकी आय 1 लाख रुपये से कम है। यह योजना पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार की 'युवा साथी योजना' की जगह लेगी।
भाषा सुभाष नरेश
नरेश
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