अदाणी समूह का 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य
मनीषा
- 24 Jun 2026, 12:47 PM
- Updated: 12:47 PM
नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने बुधवार को कहा कि समूह ने 2035 तक 10 गीगावाट (जीडब्ल्यू) परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की योजना बनाई है।
इसके साथ ही समूह ने तापीय, नवीकरणीय, जल, गैस और पारेषण परिसंपत्तियों के साथ एकीकृत ऊर्जा मंच का विस्तार करते हुए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी प्रवेश किया है।
समूह की वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए अदाणी ने कहा कि परमाणु परियोजना 'अदाणी एटॉमिक एनर्जी' के लिए भूमि की पहचान कर ली गई है। यह पहल बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और बिजली की मांग के बीच भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा, '' अदाणी एटॉमिक एनर्जी के माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में हमारा प्रवेश भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 2035 तक 10 गीगावाट क्षमता के लक्ष्य के साथ हम स्वच्छ और चौबीसों घंटे उपलब्ध बिजली की बढ़ती राष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए अग्रिम तैयारी कर रहे हैं।''
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब समूह ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में अपने निवेश को तेज कर रहा है और भारत की बदलती ऊर्जा रणनीति के केंद्र में खुद को स्थापित करना चाहता है।
उद्योगपति अदाणी ने कहा कि समूह का एकीकृत अवसंरचना मॉडल विश्वसनीय, सस्ती और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ बाहरी निर्भरता को कम करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूती बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि समूह ने वित्त वर्ष 2025-26 में अवसंरचना क्षेत्र में रिकॉर्ड 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया, जो भारत के कुल नए निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय का 30 प्रतिशत से अधिक है।
अदाणी ने कहा, '' वित्त वर्ष 2025-26 ऐसा वर्ष था जब दुनिया और अधिक विभाजित हुई, जटिल ऊर्जा सुरक्षा मॉडल फिर से राष्ट्रीय रणनीति के केंद्र में आए और प्रौद्योगिकी संप्रभुता से अलग नहीं रही। ऐसे समय में जब कुछ लोगों ने संदेह उत्पन्न करने की कोशिश की, आपने विश्वास के साथ जवाब दिया।''
ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार का नेतृत्व अदाणी पावर कर रही है, जो दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा बिजली पूंजीगत व्यय कार्यक्रम चला रही है और अगले पांच वर्षों में 45 गीगावाट उत्पादन क्षमता तक पहुंचने का लक्ष्य रखती है।
अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस में ट्रांसमिशन ऑर्डर बुक बढ़कर 72,000 करोड़ रुपये हो गई है, जिसमें खावड़ा-दक्षिण ओलपाड उच्च वोल्टेज डायरेक्ट करंट (एचवीडीसी) लाइन जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
समूह कम-कार्बन ऊर्जा क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। अदाणी ने भूटान की ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन के साथ 5,000 मेगावाट जलविद्युत परियोजनाएं विकसित करने की साझेदारी की घोषणा की है।
गैस वितरण क्षेत्र में अदाणी टोटल गैस ने 11 लाख से अधिक पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्शन का आंकड़ा पार कर लिया है और स्वच्छ ईंधन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विस्तार की योजना बना रही है।
अदाणी ने ऊर्जा के अलावा, बंदरगाह, हवाई अड्डों, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल अवसंरचना और औद्योगिक व्यवसायों में भी वृद्धि पर प्रकाश डाला।
अदाणी पोर्ट्स ने वित्त वर्ष 2025-26 में 50 करोड़ टन से अधिक माल ढुलाई की और 2030 तक एक अरब टन का लक्ष्य रखा है, जबकि विझिंजम बंदरगाह ने संचालन के पहले वर्ष में 10 लाख टीईयू का आंकड़ा पार कर लिया।
समूह ने नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और गुवाहाटी हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का उद्घाटन भी किया। इसने डेटा सेंटर कारोबार में 2030 तक तीन गीगावाट क्षमता का लक्ष्य रखा है। अदाणी ने विशाखापत्तनम में गीगावाट स्तर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए गूगल के साथ समझौते का भी उल्लेख किया।
वित्त वर्ष 2025-26 में समूह ने 2.92 लाख करोड़ रुपये का समेकित राजस्व दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.4 प्रतिशत अधिक है। कर पूर्व आय बढ़कर 94,834 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 13.9 प्रतिशत बढ़कर 46,376 करोड़ रुपये हो गया।
अदाणी ने कहा कि ये मजबूत वित्तीय परिणाम समूह को अपने महत्वाकांक्षी पूंजीगत व्यय योजनाओं को आगे बढ़ाने और भारत के प्रमुख अवसंरचना क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश जारी रखने की क्षमता देते हैं।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि समूह अनिश्चितताओं के दौर में भी निवेश जारी रखेगा और भारत की भौतिक तथा ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत बनाने में योगदान देगा।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा
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