जम्मू-कश्मीर की नेकां सरकार ने पिछले दरवाजे से 25,000 लोगों की भर्ती की: महबूबा मुफ्ती
धीरज
- 25 Jun 2026, 04:02 PM
- Updated: 04:02 PM
श्रीनगर, 25 जून (भाषा) जम्मू-कश्मीर में विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश में पिछले दरवाजे से 25,000 लोगों की भर्ती की है।
महबूबा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''नेकां सरकार के 25 महीनों के कार्यकाल में लगभग 25,000 लोगों की भर्ती पिछले दरवाजे से की गई। मेरे पास इनके आदेश हैं लेकिन मैं उनकी पहचान उजागर नहीं करना चाहती, ताकि उनकी सुरक्षा बनी रहे। साथ ही, किसी अन्य उम्मीदवार का साक्षात्कार भी नहीं लिया गया।''
उन्होंने कहा, "ये सामान्य पद नहीं थे बल्कि जम्मू-कश्मीर के विभिन्न सरकारी विभागों में खाली पड़े पद थे, जिन्हें सरकार ने अपने मंत्रियों, विधायकों और गठबंधन सहयोगियों को दे दिया। मुझे लगता है कि इसमें भाजपा की भी हिस्सेदारी है, इसलिए वे चुप हैं और इस मुद्दे पर कोई हो-हल्ला नहीं कर रहे हैं।"
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पीडीपी को इन नियुक्तियों को लेकर शिकायतें मिली थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उम्मीदवारों से दो से तीन लाख रुपये लिए। महबूबा ने दावा किया, "इसके लिए लगभग 200 निजी 'आउटसोर्सिंग एजेंसियों' का इस्तेमाल किया गया। कुछ समय के लिए एक वेबसाइट खुली रही, जहां उम्मीदवारों से आवेदन करने को कहा गया। जैसे ही वे आवेदन जमा करते थे, वेबसाइट बंद हो जाती थी।"
पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने अपनी सूची 'आउटसोर्सिंग एजेंसियों' को दी, जिन्होंने भर्ती की प्रक्रिया पूरी की।
उन्होंने कहा, "एक रमजान साहब हैं, एक आयुष साहब हैं। मैं उनके पदों का खुलासा नहीं करना चाहती। कई विभागों में ऐसे और भी लोग हैं, चाहे वे उनके पीआरओ हों या सचिव, जो विधायकों से सूची लेते थे और फिर उसे आउटसोर्सिंग एजेंसियों को दे दिया जाता था।"
महबूबा ने आरोप लगाया कि इस तरह की नियुक्तियां बिना किसी विज्ञापन के की गईं।
उन्होंने इन नियुक्तियों को तुरंत बंद करने की मांग की।
घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी के बारे में पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि उनकी कुछ 'लॉबी' अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए समुदाय की पीड़ा को 'हथियार' के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही हैं।
महबूबा ने कहा, ''साथ ही, उन्हें(कश्मीरी पंडितों को) अतीत के बारे में सोचना बंद कर भविष्य की ओर देखना चाहिए। जम्मू-कश्मीर में मारे गए लोगों में से लगभग 99 प्रतिशत मुसलमान हैं। केवल एक प्रतिशत हमारे पंडित भाई थे, जिनकी आबादी बहुत कम है।''
भाषा जितेंद्र धीरज
धीरज
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