चीन, बांग्लादेश तीस्ता नदी प्रबंधन पर सहयोग मजबूत करने को सहमत : मीडिया
नरेश
- 25 Jun 2026, 04:25 PM
- Updated: 04:25 PM
(केजएम वर्मा)
बीजिंग, 25 जून (भाषा) बांग्लादेश और चीन ने तीस्ता और अन्य नदियों के प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर बृहस्पतिवार को सहमति जताई। मीडिया में आई खबरों में यह दावा किया गया है।
बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी 'बांग्लादेश संगबाद संस्था' (बीएसएस)की ओर से दी गई खबर के मुताबिक यह सहमति चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग की बीजिंग में मौजूद बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात के दौरान बनी।
रहमान इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर मलेशिया गए थे। वह 22 जून को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से चीन के डालियान शहर पहुंचे, जहाँ उन्होंने विश्व आर्थिक मंच के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
रहमान बुधवार को डालियान से हाई-स्पीड ट्रेन से बीजिंग पहुंचे। उम्मीद की जा रही है कि वह अपने बीजिंग प्रवास के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, प्रधानमंत्री ली क्विंग और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें करेंगे।
खबर के मुताबिक रहमान ने ली के साथ बैठक के दौरान बांग्लादेश में नदियों से गाद निकालने के कार्यक्रम को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य बाढ़ के जोखिम को कम करना, पर्यावरण की रक्षा करना और जल संसाधनों का सही प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
रहमान ने बैठक के दौरान बांग्लादेश के जल संसाधन प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए चीन से सहयोग मांगा।
खबर के मुताबिक बांग्लादेशी प्रधानमंत्री ने तीस्ता प्रबंधन परियोजना के लिए चीन से तकनीकी सहायता भी मांगी। इसके जवाब में, चीन के मंत्री ने जल संसाधन प्रबंधन में बांग्लादेश सरकार की पहलों में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
खबर के मुताबिक ली ने 2005 में ढाका और बीजिंग के बीच हुए समझौते और पिछले साल चीनी जल विशेषज्ञों के बांग्लादेश दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग व्यावहारिक और शोध पर आधारित है।
खबर में कहा गया कि रहमान ने बांग्लादेश में नदी के किनारे के कटाव को रोकने, सिंचाई प्रणालियों को बेहतर बनाने और देश के भीतर जल परिवहन को बढ़ाने के लिए भी चीन से मदद मांगी।
बीएसएस के मुताबिक चीन के मंत्री ने कहा कि बांग्लादेश को जल प्रबंधन के क्षेत्र में चीन के अनुभव से फायदा हो सकता है और उन्होंने बांग्लादेश के जल विशेषज्ञों तथा संबंधित अधिकारियों को चीन में प्रशिक्षण लेने के लिए आमंत्रित किया।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में तीस्ता परियोजना एक संवेदनशील मुद्दा है। फरवरी में रहमान सरकार के सत्ता संभालने के बाद इन संबंधों में सुधार के संकेत दिखे हैं। इससे पहले मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का संक्षिप्त कार्यकाल रहा था, जिसके दौरान नयी दिल्ली और ढाका के संबंध खराब हो गए थे।
बीएसएस ने खबर दी कि पिछले महीने जब विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने बीजिंग का दौरा किया था, तब रहमान सरकार ने तीस्ता नदी पुनरुद्धार परियोजना के लिए औपचारिक रूप से चीन की भागीदारी और समर्थन मांगा था।
तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है जहां यह लाखों लोगों के लिए सिंचाई और आजीविका का एक मुख्य स्रोत है।
चीन कई सालों से तीस्ता नदी के व्यापक प्रबंधन और पुनरुद्धार परियोजना को विकसित करने में दिलचस्पी दिखा रहा है। यह परियोजना भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के पास स्थित है, जो मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।
इस पृष्ठभूमि में, भारत ने 2024 में तीस्ता बेसिन के लिए तकनीकी और संरक्षण संबंधी सहायता की पेशकश की, जो सीमा-पार नदियों के प्रबंधन पर ढाका के साथ सहयोग को और प्रगाढ़ करने की दिल्ली की कोशिशों को दर्शाता है।
भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में पानी का बंटवारा एक अहम मुद्दा रहा है। यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के जल के बंटवारे (खासकर सूखे के मौसम में) को लेकर 1996 में 30 साल के लिए हुई संधि की मियाद इस साल समाप्त होने वाली है।
भाषा धीरज नरेश
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