जीटीआरआई का नए गुणवत्ता प्रमाणन व्यवस्था के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी करने का आग्रह
रमण
- 27 Jun 2026, 05:05 PM
- Updated: 05:05 PM
नयी दिल्ली, 27 जून (भाषा) उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) को कंपनियों के लिए नई बदलाव प्रक्रिया के तहत उत्पाद गुणवत्ता प्रमाणन के आवेदन की पात्रता, दस्तावेज आवश्यकताओं और समयसीमा को स्पष्ट करने के लिए विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश जारी करने चाहिए। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने शनिवार को यह बात कही।
डीपीआईआईटी ने 25 जून को 'ट्रांजिशन फैसिलिटेशन' यानी संक्रमण सुविधा (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 2026 अधिसूचित किया है।
आदेश के तहत विभाग ने 10 चयनित गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) के लिए एक वैकल्पिक अनुपालन मार्ग तैयार किया है, जिनमें खिलौने, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, एयर कंडीशनर और कंप्रेसर, जूते, फर्नीचर, कब्जे, घरेलू विद्युत उपकरण और घरेलू विद्युत सुरक्षा उत्पाद शामिल हैं।
इन आवेदनों की जांच डीपीआईआईटी की अध्यक्षता वाली कार्यान्वयन समिति करेगी, जिसमें भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), वाणिज्य विभाग, उपभोक्ता मामले विभाग, विदेश व्यापार महानिदेशालय और अन्य मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
यह सुधार लंबे समय से उठ रही उन चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से लाया गया है, जिनमें कहा गया था कि भारत का गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र अनिवार्य बीआईएस प्रमाणन में देरी के कारण अधिक जटिल होता जा रहा है।
हालांकि, जीटीआरआई ने कहा कि इस व्यवस्था के तहत केवल कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पंजीकृत कंपनियां ही आवेदन के लिए पात्र होंगी।
इसका अर्थ यह है कि केवल वे विदेशी विनिर्माता आवेदन कर सकेंगे जिनकी भारत में कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत प्रतिनिधि इकाई हो, जिससे अधिकांश विदेशी कंपनियों के लिए इस योजना का उपयोग सीमित हो सकता है।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि इस सुधार से बीआईएस फैक्टरी निरीक्षण पर निर्भरता कम होगी, जिससे गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था की सबसे बड़ी परिचालन समस्या दूर होने की उम्मीद है। हालांकि, आलोचकों का तर्क हो सकता है कि यह कदम केवल एक नियामक बाधा को हटाकर उसकी जगह दूसरी बाधा खड़ी करने जैसा है।
उन्होंने कहा कि निर्माताओं को अब बीआईएस निरीक्षण का इंतजार करने के बजाय एक अंतर-मंत्रालयी सरकारी समिति से मंजूरी लेनी होगी, जिसके पास व्यापक विवेकाधीन शक्तियां होंगी।
श्रीवास्तव के मुताबिक, चूंकि इस समिति का मूल्यांकन केवल तकनीकी मानकों के अनुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीयकरण, आपूर्ति श्रृंखला विकास और व्यापक औद्योगिक नीति जैसे पहलू भी शामिल हैं, इसलिए यह नया ढांचा प्रभावी रूप से भारत के गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र को 'क्यूसीओ प्लस' प्रणाली में बदल देता है।
श्रीवास्तव ने कहा कि नई व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कार्यान्वयन समिति कितनी दक्षता और पारदर्शिता से काम करती है।
उन्होंने कहा कि डीपीआईआईटी को विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश जारी करने चाहिए, जिनमें पात्रता मानदंड, दस्तावेज आवश्यकताएं, मूल्यांकन प्रक्रिया और समयसीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित हों। निर्णय पारदर्शी और मापनीय मानकों पर आधारित होने चाहिए ताकि उद्योग में अनिश्चितता न रहे।
भाषा योगेश रमण
रमण
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