माकपा पोलित ब्यूरो ने चुनावी नतीजे, विपक्षी दलों को कमजोर करने के भाजपा के प्रयासों पर चर्चा की
दिलीप
- 27 Jun 2026, 09:13 PM
- Updated: 09:13 PM
नयी दिल्ली, 27 जून (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम ए बेबी ने शनिवार को कहा कि पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक में चर्चा के लिए पोलित ब्यूरो ने हाल के विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक स्थिति के आकलन तथा ''संसदीय अवसरवाद एवं संसदीय भटकाव' समेत विभिन्न मुद्दों पर दस्तावेजों को अंतिम रूप दे दिया है।
पोलित ब्यूरो की 26-27 जून के दौरान बैठक हुई, जिसमें इस बात पर भी चर्चा हुई कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विपक्षी दलों में फूट डालकर और नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कराकर विपक्ष को कमज़ोर करने की जो कोशिश कर रही है, उससे कैसे निपटा जाए। बेबी ने कहा कि माकपा इस मुद्दे पर एक राजनीतिक अभियान शुरू करेगी तथा 'इंडिया' गठबंधन के सहयोगियों एवं अन्य दलों के साथ बातचीत करेगी।
बेबी ने कहा कि पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक 11-13 जुलाई के दौरान होगी, जिसमें आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी के कामकाज एवं अन्य दस्तावेजों के साथ इन मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह बातचीत पांच राज्यों में हाल में हुए विधानसभा चुनाव के बाद हो रही है, जिनके फलस्वरूप भाजपा ने पहली बार पश्चिम बंगाल में सरकार बनाई, जबकि केरल में 'जन-हित के शानदार कामों' के बावजूद वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) को बड़ा झटका लगा।
माकपा महासचिव ने कहा, ''केरल में एलडीएफ सरकार के बहुत अच्छे जनोन्मुखी कामकाज के बावजूद, हमें भारी झटका लगा। फिर तमिलनाडु में एक नई राजनीतिक स्थिति पैदा हुई है।''
उन्होंने कहा कि पार्टी के सुधार संबंधी दस्तावेज में उन कमियों और कमजोरियों की चर्चा है, जिन्हें दूर करने की ज़रूरत है।
बेबी ने कहा, ''इस बार हमने संसदीय अवसरवाद और संसदीय भटकाव के मुद्दे को चुना है। इसे केंद्रीय समिति की बैठक में भी रखा जाएगा।''
वामपंथी शब्दावली में, 'संसदीय अवसरवाद' और 'संसदीय भटकाव' का मतलब कम्युनिस्ट पार्टियों के भीतर उन चिंताओं से है, जिनमें चुनावी और संसदीय गतिविधियों पर बहुत ज़्यादा ज़ोर देने के कारण जन-संघर्षों और संगठनात्मक कार्यों की अनदेखी होती है।
बेबी ने भाजपा पर विपक्षी पार्टियों को कमज़ोर करके संसद में अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप) और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना (उबाठा) से जुड़ी घटनाओं का ज़िक्र किया।
उन्होंने कहा, ''तृणमूल कांग्रेस और आप के साथ जो हुआ, वह सब जानते हैं। अब शिवसेना के उद्धव ठाकरे वाले गुट को भी तोड़ा जा रहा है। यानी भाजपा राजनीतिक ढांचे में भी व्यावसायीकरण के तरीकों का इस्तेमाल कर रही है।''
कॉरपोरेट जगत में कंपनियों के अधिग्रहण, विलय और 'टेकओवर' का उदाहरण देते हुए बेबी ने कहा, ''जिस तरह कंपनियों का अधिग्रहण, विलय और टेकओवर होता है, उसी तरह, राजनीतिक पार्टियों का भी अधिग्रहण, विलय और टेकओवर, या फिर बंटवारा और टेकओवर हो रहा है।''
उन्होंने कहा, ''यह बहुत खतरनाक है, यह असंवैधानिक है और दलबदल विरोधी कानून के भी खिलाफ है।''
माकपा नेता ने कहा कि उनकी पार्टी ऐसी घटनाओं के खिलाफ राजनीतिक अभियान चलाएगी और बदलती राजनीतिक स्थिति का जवाब देने के लिए विपक्षी खेमे के अन्य दलों के साथ चर्चा करेगी।
भाषा
राजकुमार दिलीप
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