मप्र के अधिकारियों में आरएसएस से जुड़ाव दिखाने की होड़: विजयवर्गीय,कांग्रेस ने उठाए सवाल
शोभना
- 28 Jun 2026, 12:42 PM
- Updated: 12:42 PM
भोपाल, 28 जून (भाषा) मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद अधिकारियों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ाव दिखाने की होड़ सी मच गई है।
विजयवर्गीय के इस बयान के बाद कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि प्रशासनिक तंत्र में इस प्रकार की पहचान का चलन बढ़ा है तो यह भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता, तटस्थता और संवैधानिक मर्यादा से जुड़ा गहरा और गंभीर विषय है।
विजयवर्गीय ने आरएसएस के प्रचारक रहे शालिग्राम तोमर की स्मृति में गत शुक्रवार को राजधानी भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह भी दावा किया कि अब संघ में 'बहुत भीड़' हो गई है और इस कारण 'अच्छे इंसानों' की कमी हो गई है।
आरएसएस और अधिकारियों को लेकर की गई विजयवर्गीय की टिप्पणियों से जुड़े कथित वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं और सवाल उठाए जा रहे हैं।
ऐसे ही एक वीडियो में विजयवर्गीय यह कहते हुए सुने जा रहे हैं, "हम सरकार में हैं तो कोई अधिकारी आता है और कहता है कि सर मैं शाखा में जाता था। अरे भाई, तुम अभी जाते हो... हमारी सरकार बनी उसके पहले तो कभी तुमने बताया नहीं।"
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि हर अधिकारी संघ के साथ अपने जुड़ाव का दिखावा करना चाहता है।
विजयवर्गीय ने कहा, "हर अधिकारी और कर्मचारी यही सोचता है... सरकार आने के बाद सब संघ के हो गए। हर अधिकारी संघ का हो गया है।''
उन्होंने एक वाक्या सुनाया कि संघ से जुड़ाव दर्शाने के लिए ऐसे ही एक अधिकारी ने उनसे कहा था कि उसके पिता आरएसएस की शाखा के अध्यक्ष थे जबकि संगठन में ऐसा कोई पद ही नहीं होता है।
विजयवर्गीय ने दिवंगत शालिग्राम तोमर सहित मध्यप्रदेश के आरएसएस के कुछ अन्य पदाधिकारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सभी बहुत अच्छे इंसान थे।
उन्होंने कहा, "ऐसे लोग कम ही मिलते हैं। संगठन बढ़ रहा है और कहने के लिए विचारधारा भी बढ़ रही है। लेकिन अगर अच्छे इंसान ही न हों, तो उस विचारधारा के महत्व पर हमें चिंतन और मनन करना चाहिए।"
कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अधिकारियों और आरएसएस से संबंधित विजयवर्गीय के बयान से जुड़ा एक वीडियो 'एक्स' पर साझा किया और कहा कि विजयवर्गीय का यह सार्वजनिक बयान अत्यंत गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा कर रहा है।
उन्होंने कहा, ''यदि प्रशासनिक तंत्र में इस प्रकार की पहचान का चलन बढ़ा है, तो यह केवल राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता, तटस्थता और संवैधानिक मर्यादा से जुड़ा गहरा और गंभीर विषय है!''
पटवारी ने कहा कि भारत का संविधान यह अपेक्षा करता है कि शासन का प्रत्येक अधिकारी संविधान के प्रति निष्ठावान हो किसी राजनीतिक या वैचारिक संगठन के प्रति नहीं।
उन्होंने राष्ट्रपति और मध्यप्रदेश के राज्यपाल से इसका संज्ञान लेने का आग्रह किया और कहा कि इसकी संवैधानिक समीक्षा आवश्यक है।
भाषा ब्रजेन्द्र रंजन शोभना
शोभना
2806 1242 भोपाल