बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में 65 वर्षीय बुजुर्ग को मौत की सजा
वैभव
- 29 Jun 2026, 04:24 PM
- Updated: 04:24 PM
पुणे, 29 जून (भाषा) पुणे की एक विशेष अदालत ने नसरापुर गांव में तीन साल की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में सोमवार को 65 वर्षीय व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई।
इस घटना के बाद महाराष्ट्र में भारी जन आक्रोश और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे।
अतिरिक्त न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश) एस. आर. सालुंखे ने इस मामले को ''दुर्लभ से दुर्लभतम'' करार देते हुए भीमराव कांबले को सजा सुनाई जो उस समय कठघरे में मौजूद था।
जैसे ही न्यायाधीश ने मौत की सजा सुनाई, बच्ची का परिवार अदालत कक्ष में रो पड़ा।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
अपने फैसले के मुख्य हिस्से को पढ़ते हुए न्यायाधीश सालुंखे ने कहा कि अभियोजन के पक्ष में काफी मजबूत साक्ष्य मिले हैं।
अदालत ने टिप्पणी की, ''यह अपराध एक ऐसे आरोपी द्वारा हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देने से संबंधित है, जिसका पिछला आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और गंभीर हमलों का एक लंबा इतिहास रहा है।''
अदालत ने एक मई को हुई इस आपराधिक घटना के साठ दिन के भीतर 25 जून को आरोपी को दोषी ठहराया था।
यह घटना एक मई को अपराह्न तीन से चार बजे के बीच हुई थी। आरोप है कि कांबले पुणे जिले के नसरापुर गांव में बच्ची को खाने की चीजें दिलाने और मवेशी का बच्चा (बछड़ा) दिखाने का झांसा देकर अपने साथ ले गया था। वह उसे मवेशियों के बाड़े के पास एक शेड में ले गया, जहां उसने बच्ची का यौन शोषण किया और फिर उसका मुंह दबाकर व छाती पर गंभीर चोटें पहुंचाकर उसकी हत्या कर दी थी।
न्यायाधीश सालुंखे ने कहा, ''यह अपराध बेहद जघन्य तरीके से किया गया और पीड़िता को यातनाएं दी गईं तथा नृशंस व्यवहार किया गया। पीड़िता एक मासूम और असहाय बच्ची थी। उसकी हत्या केवल अपनी वासना की पूर्ति के लिए की गई, जो आरोपी की विकृत मानसिकता और नैतिक पतन को दर्शाती है। यह बिना किसी उकसावे के की गई सुनियोजित और निर्मम हत्या थी। अपराध को जिस क्रूरता से अंजाम दिया गया, उसने न केवल न्यायपालिका को बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा को भी झकझोर दिया है।''
अभियोजन पक्ष ने अदालत से आरोपी को फांसी की सजा देने का अनुरोध करते हुए कहा कि उसके सुधरने की कोई गुंजाइश नहीं है। अभियोजन ने यह भी बताया कि उसके खिलाफ पहले भी 62 वर्षीय महिला, 17 वर्षीय किशोरी और एक पशु से जुड़े अपराधों के मामले दर्ज रहे हैं।
वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र और उसके द्वारा अपराध से इनकार किए जाने को सजा में रियायत देने का आधार बताया।
हालांकि, अदालत ने माना कि इस मामले में आरोपी की उम्र उसके पक्ष में नहीं, बल्कि उसके खिलाफ जाती है।
न्यायाधीश ने कहा, ''इतनी उम्र में भी आरोपी की वासना कम नहीं हुई, बल्कि और खतरनाक रूप ले चुकी है। तीन साल की मासूम बच्ची के शरीर पर मिले चोट के निशान बताते हैं कि उसके साथ कितनी बेरहमी और अमानवीयता बरती गई।''
उन्होंने कहा, ''आरोपी ने बच्ची के साथ जो कुछ भी किया, वह बिना किसी डर और पूरी निर्ममता से किया। उसे शायद यह भरोसा था कि पहले की तरह इस बार भी मुकदमा चलने के बावजूद उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा।''
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि निर्भया कांड के बाद बच्चों के खिलाफ अपराधों की त्वरित सुनवाई के लिए कड़े कानून बनाए गए और विशेष अदालतें गठित की गईं। इसके बावजूद ऐसे जघन्य अपराध लगातार हो रहे हैं और ऐसे अपराध हर बार समाज की अंतरात्मा को झकझोर देते हैं।
इस फैसले पर अदालत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय न्याय के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री ने फोन पर पुणे के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल और विशेष लोक अभियोजक अजय मिसर से भी बात की और मामले को न्याय तक पहुंचाने के लिए उनकी सराहना की।
इसमें कहा गया कि फडणवीस ने रिकॉर्ड समय में जांच पूरी करने और सुनवाई संचालित करने के लिए जांच एजेंसियों की सराहना की, जिससे मामले का तेजी से निपटारा हो सका।
पत्रकारों से बातचीत में विशेष लोक अभियोजक अजय मिसर ने इस फैसले को ''ऐतिहासिक'' करार देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने उच्चतम न्यायालय के 12 फैसलों का हवाला देकर यह सफलतापूर्वक साबित किया कि यह मामला ''दुर्लभ से दुर्लभतम'' श्रेणी में आता है।
उन्होंने कहा, ''आरोपी ने इस अपराध को सुनियोजित साजिश और निर्ममता के साथ अंजाम दिया। अभियोजन पक्ष ने अदालत से कहा कि आरोपी किसी भी प्रकार की दया का पात्र नहीं है। यह अत्यंत जघन्य अपराध था। बच्ची की मौत के बाद भी उसका यौन उत्पीड़न किया गया।''
मिसर ने बताया कि सुनवाई के दौरान अदालत ने बच्चों सहित 10 गवाहों के बयान एक ही दिन में दर्ज किए।
उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष अपहरण, छेड़छाड़, दुष्कर्म और हत्या के आरोपों के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत लगाए गए सभी आरोप सिद्ध करने में सफल रहा।
इस बीच, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह फैसला बच्चों के साथ यौन अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश है।
उन्होंने मजबूत साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस विभाग, पुलिस अधीक्षक और पूरी जांच टीम की सराहना करते हुए कहा कि उनकी अथक मेहनत के कारण त्वरित अदालत ने कम समय में मृत्युदंड का फैसला सुनाया।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले से लोगों का न्यायपालिका पर विश्वास और मजबूत हुआ है तथा पीड़िता के परिवार को न्याय मिला है।
उन्होंने कहा कि ऐसे ''क्रूर और विकृत मानसिकता वाले'' अपराधियों के लिए समाज में कोई स्थान नहीं है। यह फैसला कानून के निवारक प्रभाव को और मजबूत करेगा तथा इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद करेगा।
पवार ने कहा कि महिलाओं, बालिकाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार आगे भी कड़े से कड़े कदम उठाती रहेगी।
भाषा खारी वैभव
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