बिहार: निविदा घोटाले को लेकर तेजस्वी ने किए 20 सवाल, निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की
संतोष
- 29 Jun 2026, 04:40 PM
- Updated: 04:40 PM
पटना, 29 जून (भाषा) बिहार में ठेकेदार रिशु श्री से जुड़ा कथित निविदा (टेंडर)घोटाला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को इस मामले को लेकर राज्य की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि हजारों करोड़ रुपये के कथित निविदा घोटाले में अब तक कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं मिले हैं।
तेजस्वी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर जारी पोस्ट में दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) और अन्य एजेंसियों की जांच में सामने आए तथ्यों के बाद सरकार को पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कुल 20 सवालों के जरिए सरकार की कार्यप्रणाली, जांच की दिशा और प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्न उठाए।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक सामान्य ठेकेदार बताए जा रहे रिशु श्री ने कई विभागों की निविदा प्रक्रिया को इतना कैसे प्रभावित किया।
उन्होंने पूछा कि यदि यह सब वर्षों तक चलता रहा तो निगरानी तंत्र, वित्तीय ऑडिट और प्रशासनिक व्यवस्था क्या कर रही थी।
उनके अनुसार यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कहीं अधिकारियों ने निजी लाभ के लिए पूरे तंत्र की अनदेखी तो नहीं की।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष ने ईडी जांच का हवाला देते हुए दावा किया कि जांच में सामने आए चैट भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के कई वरिष्ठ अधिकारियों के प्रभावशाली नेटवर्क की ओर संकेत करते हैं।
उन्होंने सवाल किया कि रिशु श्री को किस स्तर का संरक्षण प्राप्त था और वह अधिकारियों को किसके भरोसे निर्देश देता था।
उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपपत्र में कई प्रभावशाली लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं, जिससे जांच को लेकर राजनीतिक दबाव की आशंका पैदा होती है।
तेजस्वी ने दो आईएएस अधिकारियों के निलंबन का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है तो आरोपपत्र में उनके नाम क्यों नहीं हैं और उनकी गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई।
उन्होंने यह भी पूछा कि यदि सरकार के पास सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़ी जानकारी है तो उसे अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में यह बात सामने आई है कि निविदा प्रक्रिया पहले से तय होती थी और पात्रता की शर्तें भी उसी के अनुरूप बदली जाती थीं। तेजस्वी ने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री कार्यालय अथवा सत्ता के शीर्ष स्तर पर बैठे लोगों की भूमिका की भी जांच होगी।
उन्होंने दो से 3.5 प्रतिशत कमीशन लेने की कथित व्यवस्था का उल्लेख करते हुए भ्रष्टाचार के प्रति सरकार के 'कतई बर्दाश्त नहीं करने' के दावे पर सवाल उठाया।
राजद नेता ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या रिशु श्री और उससे जुड़ी कंपनियों को मिले सभी सरकारी ठेकों की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाएगी।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जिन कंपनियों को लाभ मिला, उनमें गुजरात की कंपनियों की संख्या अधिक होने के आरोपों की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि जांच में अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेश यात्राओं का खर्च उठाए जाने और महंगे उपहार दिए जाने जैसी बातें भी सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे में गृह विभाग, आर्थिक अपराध इकाई, निगरानी और खुफिया एजेंसियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
तेजस्वी ने कहा कि छापेमारी के दौरान 99 संपत्तियों के दस्तावेज तथा बड़ी मात्रा में नकदी और आभूषण मिलने की जानकारी सामने आई है।
उन्होंने पूछा कि एक ठेकेदार के पास इतनी बड़ी संपत्ति कैसे पहुंची और इसकी समय रहते पहचान क्यों नहीं हो सकी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई कर रही है, जबकि कथित सिंडिकेट के शीर्ष स्तर तक जांच नहीं पहुंच रही है।
तेजस्वी ने संबंधित विभागों के मंत्रियों से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब ईडी की जांच में कई तथ्य सामने आ चुके थे, तब बिहार पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज करने में महीनों की देरी क्यों हुई। उन्होंने इस देरी की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
तेजस्वी ने कोसी बेसिन विकास परियोजना और कोसी बांध से जुड़े ठेकों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यदि बाढ़ नियंत्रण जैसी संवेदनशील परियोजनाओं में भी कथित निविदा माफिया की भूमिका रही है तो यह गंभीर प्रशासनिक चिंता का विषय है।
उन्होंने पूछा कि राज्य का आंतरिक ऑडिट तंत्र, सतर्कता विभाग और ई-टेंडरिंग व्यवस्था ऐसे मामलों को समय रहते रोकने में क्यों विफल रही।
नेता प्रतिपक्ष ने विशेष निगरानी इकाई के लगभग 4,000 पृष्ठों के आरोपपत्र का हवाला देते हुए कहा कि उसमें केवल सात मुख्य आरोपियों को नामजद किया गया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अन्य प्रभावशाली लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने का आधार क्या है। उन्होंने यह भी पूछा कि बड़े मामलों में कार्रवाई के दौरान केवल कुछ चुनिंदा अधिकारियों पर ही कार्रवाई क्यों होती है।
तेजस्वी ने कहा कि बिहार की जनता पूरे मामले में पारदर्शी जांच और जवाबदेही चाहती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि रिशु श्री से जुड़े कथित निविदा घोटाले से संबंधित सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।
इस मामले में तेजस्वी यादव के आरोपों और सवालों पर राज्य सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
उल्लेखनीय है कि रिशु श्री निविदा (टेंडर) घोटाला बिहार में सरकारी टेंडरों के आवंटन में कथित भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और धन शोधन से जुड़ा मामला है। इसकी जांच मुख्य रूप से ईडी और बिहार की विशेष सतर्कता इकाई (एसवीयू) कर रही हैं।
भाषा कैलाश
वैभव संतोष
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