दिल्ली के उपराज्यपाल ने सीसीटीवी मामले में सत्येंद्र जैन के खिलाफ जांच की सिफारिश को मंजूरी दी
सुरेश माधव
- 06 Jul 2024, 10:00 PM
- Updated: 10:00 PM
नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने राष्ट्रीय राजधानी सरकार क्षेत्र के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। राजनिवास के अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
यह मामला राष्ट्रीय राजधानी में सीसीटीवी लगाने में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने आरोप लगाया कि जैन के खिलाफ मामला उसके और दिल्ली सरकार के खिलाफ भाजपा की "निरंतर साजिशों" का हिस्सा है।
दूसरी ओर, भाजपा ने कहा कि जांच की मंजूरी "कोई आश्चर्य की बात नहीं है" और इसकी बहुत पहले से उम्मीद थी।
आप ने एक बयान में कहा, ‘‘भाजपा दिल्ली सरकार के कामों को रोकने के लिए दिन-रात उसके खिलाफ लगातार साजिश रच रही है।"
आप ने दावा किया कि ‘‘पिछले 10 साल में आप के मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ 200 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और दिल्ली के मुख्यमंत्री (अरविंद) केजरीवाल सहित हमारे शीर्ष नेतृत्व को जेल भेज दिया गया है। यह मामला ‘आप’ को दबाने की दिशा में एक और कदम है"।
हालांकि, भाजपा ने जैन को ‘‘दिल्ली कैबिनेट में भ्रष्टाचार का मास्टर’’ बताया।
जैन को मई 2022 में धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं।
राज निवास के अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा मामले में आरोप लगाया गया है कि जैन ने दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में सीसीटीवी लगाने में देरी के लिए एक कंपनी पर लगाए गए 16 करोड़ रुपये के जुर्माने को माफ करने के लिए सात करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी।
उन्होंने कहा कि सक्सेना ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत मामले को केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजने के सतर्कता निदेशालय के प्रस्ताव पर सहमति जताई, ताकि भ्रष्टाचार निरोधक शाखा द्वारा जैन के खिलाफ जांच की मंजूरी मिल सके।
अधिकारियों ने बताया कि जैन लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री थे और दिल्ली में 571 करोड़ रुपये की लागत से 1.4 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाने की परियोजना के नोडल अधिकारी थे।
जैन ने धनशोधन मामले में गिरफ्तारी के कुछ महीने बाद फरवरी 2023 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
अपने बयान में आप ने दावा किया कि उसके नेताओं के खिलाफ बड़ी संख्या में भ्रष्टाचार के मामले दर्ज होने के बावजूद जांच एजेंसियां अभी तक एक भी पैसा बरामद नहीं कर सकी है।
पार्टी की ओर से कहा गया है, ‘‘जब से आप (दिल्ली में) सत्ता में आई है, भाजपा और उसकी केंद्र सरकार ने इसे कमजोर करने और पंगु बनाने की हर संभव कोशिश की है।’’
इसने आरोप लगाया कि इसमें उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ जीएनसीटीडी अधिनियम लागू करना और मोहल्ला क्लीनिकों तथा सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं के भुगतान को रोककर नौकरशाही के माध्यम से जनहित की पहल को बाधित करना शामिल है।’’
पार्टी ने कहा कि आप नेताओं के खिलाफ यह 201वां मामला है और “पिछले 200 मामलों की तरह, भाजपा और उसकी केंद्र सरकार दिल्ली सरकार को पंगु बनाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि आप एक ईमानदार पार्टी है।”
भाजपा की दिल्ली इकाई के प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि “सीसीटीवी लगाने से संबंधित परियोजना से जैन द्वारा प्राप्त रिश्वत” की जांच की मंजूरी बहुत पहले से अपेक्षित थी।
भाषा सुरेश