अर्थव्यवस्था मज़बूत, पर मानसून और पश्चिम एशिया संकट से अब भी जोखिम: वित्त मंत्रालय रिपोर्ट
अजय
- 30 Jun 2026, 07:49 PM
- Updated: 07:49 PM
अर्थव्यवस्था मज़बूत, पर मानसून और पश्चिम एशिया संकट से अब भी जोखिम:
नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन कुछ उच्च-आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतकों में नरमी से गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ने के संकेत मिल रहे हैं। वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
इस रिपोर्ट में मानसून, अल नीनो के प्रभाव और वैश्विक संकट से उपजे जोखिम भी दर्शाए गए हैं।
वित्त मंत्रालय ने अपनी नवीनतम मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा है कि 2025-26 में मज़बूत वृद्धि प्रदर्शन के बाद, 2026-27 के शुरुआती महीनों में भी आर्थिक गतिविधियां मज़बूत बनी रहीं।
मंत्रालय ने कहा, ''ई-वे बिल की संख्या, क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई), बिजली की खपत और वाहन बिक्री जैसे उच्च-आवृत्ति संकेतक घरेलू आर्थिक गतिविधियों में अंतर्निहित मजबूती को दर्शाते रहे हैं।''
रिपोर्ट कहती है, ''दूसरी ओर, प्रमुख उद्योगों, ईंधन खपत, हवाई यात्री यातायात, उपभोक्ता विश्वास और श्रम बाजार जैसे कुछ प्रमुख संकेतकों में नरमी से आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार में कुछ कमी आने के संकेत मिल रहे हैं।''
वित्त मंत्रालय ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव के बीच आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति अपेक्षाकृत नियंत्रित रह सकती है। वैश्विक जिंस बाजार में नरमी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और यूरिया आदि की कीमतों में कमी से आयातित महंगाई का दबाव कम होने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और व्यापार प्रवाह को संघर्ष-पूर्व स्थिति में लौटने में समय लग सकता है, लेकिन वैश्विक जिंस कीमतों में गिरावट से कीमतों पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
मंत्रालय के अनुसार, सरकार के हस्तक्षेप, प्रमुख कृषि जिंस का पर्याप्त बफर भंडार और आपूर्ति प्रबंधन के उपाय संभावित आपूर्ति बाधाओं के प्रभाव को कम करने में मदद करेंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे बाहरी और महंगाई संबंधी दबाव कम हुआ है। इसके अलावा, व्यापार समझौतों में प्रगति और अन्य उपायों से विदेशी पूंजी प्रवाह को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, मंत्रालय ने आगाह किया कि मानसून, अल नीनो की संभावित स्थिति और वैश्विक संकट आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित करखे रहेंगे। साथ ही, अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति और पोत परिवहन में व्यवधान उत्पन्न होता है, तो ऊर्जा आपूर्ति और जिंस की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
भाषा यासिर अजय
अजय
3006 1949 दिल्ली