10 महीने से भी कम समय में दोषसिद्धि आपराधिक कानून सुधारों की सफलता का प्रतीक: अधिकारी
सुरेश
- 30 Jun 2026, 11:45 PM
- Updated: 11:45 PM
नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति को बाल यौन उत्पीड़न के मामले में अपराध की तारीख से 10 महीने के भीतर दोषी ठहराया था और इस मामले में पुलिस जांच केवल 10 दिनों के भीतर पूरी कर ली गई थी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि यह मामला, भारत के तीन नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर सामने आई सफलता की कहानियों में शामिल है।
यह मामला जून 2025 में दिल्ली के बवाना इलाके में दो-वर्षीय बच्ची के साथ हुए गंभीर यौन उत्पीड़न से जुड़ा था।
अस्पताल से सूचना मिलने के तुरंत बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की और नए आपराधिक कानूनों के तहत मामले की जांच शुरू की।
चूंकि इस अपराध में सात वर्ष से अधिक कारावास की सजा का प्रावधान था, इसलिए जांच अधिकारियों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत अपराध स्थल का अनिवार्य फॉरेंसिक निरीक्षण कराया।
जरूरी साक्ष्य एकत्र किए गए, चिकित्सीय साक्ष्यों का दस्तावेजीकरण किया गया और गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जबकि फॉरेंसिक सबूतों को वैज्ञानिक जांच के लिए रोहिणी स्थित फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया।
जांच 10 दिनों के भीतर पूरी कर ली गई और निर्धारित समयसीमा के अंदर सात जुलाई 2025 को आरोपपत्र दाखिल किया गया।
अदालत ने एक महीने के भीतर यानी 30 जुलाई 2025 को आरोप तय कर दिए।
अभियोजन पक्ष ने मुकदमे के दौरान घटनाक्रम की अटूट कड़ी स्थापित करने के लिए चिकित्सीय साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही और दस्तावेजी साक्ष्यों का सहारा लिया जबकि आरोपी की ओर से बचाव पक्ष का कोई गवाह पेश नहीं किया गया।
रोहिणी अदालत ने चार अप्रैल 2026 को आरोपी को भारतीय न्याय संहिता और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई, 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया और पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी का अपराध सिद्ध किया है और साक्ष्यों की शृंखला को 'पूर्ण व भरोसेमंद' पाया।
यह मामला नए कानूनों - भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम - की सफलता की कहानियों में शामिल है, जिनके लागू होने के दो वर्ष मंगलवार को पूरे हो गए।
एक जुलाई 2024 से लागू हुए इन तीनों कानूनों ने ब्रिटिश काल के कानून - भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम - का स्थान लिया था।
इसके साथ ही स्वतंत्रता के बाद भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में सबसे बड़ा बदलाव आया।
भाषा जितेंद्र सुरेश
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