मटन की कमी से कश्मीरी शादियों पर संकट, व्यापारियों ने पंजाब को ठहराया जिम्मेदार
माधव
- 01 Jul 2026, 05:26 PM
- Updated: 05:26 PM
श्रीनगर, एक जुलाई (भाषा) कश्मीर में मटन की कमी के कारण शादियों का जश्न फीका पड़ रहा है। घाटी के व्यापारियों का मानना है कि यह समस्या पंजाब सरकार द्वारा राज्य से होकर गुजरने वाले पशुओं पर लगाए गए ''गैर-कानूनी'' कर की वजह से है।
कश्मीर में शादियां 'वाज़वान' के बिना अधूरी होती हैं; यह कई तरह के व्यंजनों वाला मांस-आधारित पारंपरिक भोजन है, जो जश्न में खाने-पीने के मुख्य आकर्षण के तौर पर होता है।
औसत कश्मीरी शादी में लगभग 500 किलोग्राम मटन और 150 किलोग्राम चिकन की खपत होती है, जबकि शानदार शादियों में एक टन से ज्यादा मटन का इस्तेमाल होता है।
व्यापारियों का कहना है कि कथित कर ने घाटी में शादी-ब्याह के उत्साह को फीका कर दिया है।
बडगाम के मटन कारोबारी अल्ताफ गनई ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''पंजाब सरकार की वजह से पैदा हुई दिक्कतों के कारण हमें मटन की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। अगर यही हालात बने रहे, तो मैं शादी के इस मौसम में अपने ग्राहकों को पशुओं की आपूर्ति नहीं कर पाऊंगा।''
गनई ने दावा किया कि अगर अगले 15 दिनों में गतिरोध दूर नहीं हुआ, तो उन्हें लाखों रुपये का नुकसान होगा।
उन्होंने कहा, ''मैंने राजस्थान में आपूर्तिकर्ता को भुगतान कर दिया है, लेकिन पिछले एक महीने में मुझे कोई भेड़ नहीं मिली है। अगर यही हालात बने रहे, तो गुजारा करना मुश्किल हो जाएगा।''
'ऑल कश्मीर होलसेल एंड रिटेल मटन डीलर्स एसोसिएशन' के अध्यक्ष खाज़िर मोहम्मद रेगू ने पंजाब सरकार द्वारा लगाए गए चार प्रतिशत कर की तुलना ''गुंडा टैक्स'' से की।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा कोई भी कर लगाना सही नहीं है, क्योंकि पशु राजस्थान या दिल्ली से खरीदे जाते हैं।
हैदरपोरा के रहने वाले अब्दुल मजीद भट मटन की कमी को देखते हुए अपने बेटे की शादी टालने के बारे में सोच रहे हैं।
भट ने कहा, ''मेरे बेटे की शादी 25 जुलाई को होनी है। मैं तय नहीं कर पा रहा हूं कि शादी की दावत का आयोजन करूं या नहीं। हो सकता है कि हमें इसे टालना पड़े।''
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने मटन कारोबारियों की चिंताएं रखी हैं और पड़ोसी राज्य से पशुओं को ले जाने वाले वाहनों की आवाजाही सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए उनसे दखल देने का आग्रह किया है।
अब्दुल्ला ने मान को सूचित किया कि मवेशियों को लेकर जम्मू कश्मीर ले जाने वाले वाहनों को ठेकदारों के कुछ समूहों द्वारा कथित रूप से रोका जा रहा है और उनसे अनधिकृत तौर पर शुल्क वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा कि जबकि ऐसे वाहनों पर सभी वैध परमिट और दस्तावेज होते हैं।
भाषा शफीक माधव
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