भाजपा ने भारत, पाकिस्तान के बीच वार्ता पुनः शुरू करने की मांग करने वाले लोगों की आलोचना की
अविनाश
- 01 Jul 2026, 08:51 PM
- Updated: 08:51 PM
नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भारत और पाकिस्तान के उन प्रतिष्ठित लोगों के समूह की कड़ी आलोचना की, जो दोनों देशों के बीच बातचीत फिर से शुरू करने और सामान्य संबंध बहाल करने की मांग कर रहे हैं। पार्टी ने उन्हें ''पाकिस्तान समर्थक गुट'' करार दिया।
भाजपा का यह बयान भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक प्रतिष्ठित नागरिकों -- जिनमें जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं -- की उस अपील के बाद आया है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शहबाज शरीफ से द्विपक्षीय बातचीत फिर शुरू करने और सामान्य संबंध बहाल करने का आग्रह किया था।
इस बारे में पूछे जाने पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने 'पीटीआई वीडियो' से कहा, ''पाकिस्तान-समर्थक इस गुट को यह पत्र पाकिस्तान को ही लिखना चाहिए।''
शुक्ला ने कहा कि भारत का यह स्पष्ट रुख रहा है कि ''बम और गोलीबारी के शोर'' के बीच शांति वार्ता नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, ''अगर पाकिस्तान आतंकवाद को प्रशिक्षण मुहैया करना और आतंक को बढ़ावा देना बंद कर दे, तो दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हो जाएगी।''
भाजपा प्रवक्ता ने अब्दुल्ला को चुनौती देते हुए कहा, ''अगर अब्दुल्ला में हिम्मत है, तो उन्हें और उनके साथियों को पाकिस्तान से कहना चाहिए कि वह आतंकवाद को बढ़ावा देना और आतंकियों को प्रशिक्षण देना बंद करे।''
इस खुले पत्र में दोनों देशों की सरकारों से कहा गया है कि वे ''दक्षिण एशिया में शांति, सामान्य स्थिति, बातचीत और सहयोग बहाल करने की दिशा में सार्थक और निरंतर कदम उठाएं।''
अब्दुल्ला, मुफ्ती, पूर्व 'रॉ' प्रमुख ए एस दुलत, राज्यसभा सदस्य मनोज झा, पूर्व राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक, पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर, पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने पत्र पर हस्ताक्षर किये हैं। उनके अलावा, कई सेवानिवृत्त राजनयिक और नागरिक समाज संस्थाओं के सदस्यों ने भी इस पर हस्ताक्षर किये हैं।
'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' के अध्यक्ष ओ.पी. शाह की देखरेख में तैयार और 61 भारतीयों एवं 55 पाकिस्तानियों के हस्ताक्षर वाले 30 जून के पत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि ''मतभेदों को सुलझाने का एकमात्र व्यावहारिक रास्ता लगातार बातचीत और संवाद ही है।''
हस्ताक्षर करने वालों ने पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल किए जाने, फिर से उच्चायुक्तों की नियुक्ति, सामान्य वीजा सेवाओं की बहाली और सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक द्विपक्षीय बातचीत फिर शुरू करने की मांग की।
उन्होंने जम्मू कश्मीर पर बातचीत करने की भी मांग की। साथ ही, दोनों देशों की ''सुरक्षा से जुड़ी वाजिब चिंताओं'' को ध्यान में रखते हुए सेना की तैनाती में कमी करने और तनाव घटाने की दिशा में कदम उठाने की भी मांग की।
इस अपील में व्यापार के रास्ते फिर से खोलने, सामान्य वाणिज्यिक संबंधों की बहाली, तरजीही राष्ट्र का दर्जा या उसके समान बिना भेदभाव वाली व्यापार व्यवस्था फिर से लागू किए जाने तथा अटारी-वाघा सीमा को दोबारा खोलने की भी मांग की गई।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश
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