भारतीय व्यापारियों को सीमा व्यापार के लिए तिब्बत पहुंचने में एक बार फिर देरी होने की आशंका
पारुल
- 02 Jul 2026, 05:20 PM
- Updated: 05:20 PM
पिथौरागढ़, दो जुलाई (भाषा) उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से सीमा व्यापार के लिए चीन नियंत्रित तिब्बत की यात्रा करने वाले भारतीय व्यापारियों को आशंका है कि तकलाकोट बाजार तक पहुंचने में इस साल एक बार फिर उन्हें देरी का सामना करना पड़ सकता है।
व्यापारियों के मन में यह आशंका तकलाकोट में मौजूद नेपाली व्यापारियों से व्हाट्सएप पर मिले उस संदेश के बाद पैदा हुई है, जिसमें चीनी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि उनकी तरह अब भारतीय व्यापारियों को भी कारोबार के लिए लाए गए सामान की सूची दिखानी होगी, जिस पर भारतीय व्यापार अधिकारी के दस्तखत मौजूद हों।
धारचूला में 'बॉर्डर ट्रेडर्स एसोसिएशन' के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंग्कली ने कहा, "अगर चीनी अधिकारियों के हवाले से दी गई यह सूचना सही है, तो हमें अपने अधिकारी के हस्ताक्षर वाली सामान सूची तैयार करनी होगी, जिसके कारण इस साल सीमा व्यापार में और देरी होगी।"
रोंग्कली के मुताबिक, इस साल सीमा व्यापार में विभिन्न कारणों से पहले ही एक महीने से अधिक की देरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि व्यापारी आठ जुलाई तक तकलाकोट बाजार पहुंचने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अगर प्रशासन को आधिकारिक रूप से ऐसी सूचना मिली है, तो यात्रा में और देरी होगी।
रोंग्कली ने कहा, "अगर हम समय से पहुंच चुके होते, तो अब तक हम अपना 30 फीसदी से अधिक सामान बेच चुके होते।"
इस बारे में पूछे जाने पर धारचूला के उप-जिलाधिकारी और व्यापार अधिकारी आशीष जोशी ने चीन की तरफ से या भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से ऐसी कोई सूचना मिलने से इनकार किया।
जोशी ने कहा, "हमारे पास ऐसी कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। ऐसा लगता है कि चीनी अधिकारियों की ओर से मांगे गए दस्तावेजों के बारे में नेपाली व्यापारियों ने सोशल मीडिया के जरिये जानकारी दी है, फिर भी हम अपने आधिकारिक स्रोतों से इसकी सच्चाई का पता लगा रहे हैं।"
कोरोना वायरस महामारी के कारण 2019 में बंद हुआ भारत-चीन सीमा व्यापार इस साल लिपुलेख दर्रे के रास्ते फिर से शुरू किया गया है।
वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार बंद हो गया था, लेकिन 1992 में दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार को बहाल किए जाने की अनुमति दे दी।
भारत-चीन के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में होने वाला व्यापार 'वस्तु विनिमय' पर आधारित है, जिसके तहत भारतीय व्यापारी चीनी-मिश्री, गुड़, सौंदर्य प्रसाधन और किराने का कुछ खास सामान लेकर तिब्बत जाते हैं और वहां से ऊन, पश्मीना जैकेट और जूते लाते हैं।
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सं दीप्ति पारुल
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