दिल्ली सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों के कैग ऑडिट का आदेश दिया
अजय
- 02 Jul 2026, 07:55 PM
- Updated: 07:55 PM
नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) दिल्ली सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों के कैग ऑडिट का आदेश दिया है। यह कदम 'रेगुलेटरी एसेट्स' के तौर पर जमा हुए 38,500 करोड़ रुपये के बकाया को देखते हुए उठाया गया है, जिसे उपभोक्ताओं से वसूला जाना है।
दिल्ली सरकार के बिजली विभाग के बुधवार को जारी आदेश के अनुसार, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) उन हालात का 'गहन' ऑडिट करेंगे जिनके तहत वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल), बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपी) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लि. (टीपीडीडीएल) 'रेगुलेटरी एसेट्स' की वसूली किए बिना काम करती रही हैं।
विद्युत क्षेत्र में, 'रेगुलेटरी एसेट्स' (आरए) एक आस्थगित लागत होती है। जब किसी बिजली कंपनी की बिजली आपूर्ति की लागत उसके द्वारा प्राप्त राजस्व से अधिक हो जाती है, तो नियामक इस नुकसान को स्थगित कर देते हैं ताकि उपभोक्ताओं को तत्काल, तीव्र मूल्य वृद्धि से बचाया जा सके। बिजली कंपनी को कानूनी रूप से इस राजस्व अंतर की वसूली भविष्य में, आमतौर पर ब्याज सहित, करने की अनुमति होती है।
आदेश में कहा गया है कि ऑडिट का काम आदेश मिलने की तारीख से तीन महीने के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। हालांकि, ऑडिट के दायरे और जटिलता को देखते हुए कैग समय सीमा बढ़ाने पर विचार कर सकता है।
इस आदेश पर टिप्पणी करते हुए बीआरपीएल के प्रवक्ता ने कहा, ''दिल्ली की वितरण कंपनी के कैग ऑडिट का मामला अभी अदालतों में विचाराधीन है। चूंकि मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत है, इसलिए इस पर आगे कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।''
इस बारे में अन्य वितरण कंपनियों से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
अगर वितरण कंपनियां कानूनी रास्ता नहीं अपनाती हैं, तो 2002 में बिजली वितरण के निजीकरण के बाद यह पहली बार होगा जब दिल्ली में डिस्कॉम का कैग ऑडिट होगा। इससे पहले, तत्कालीन आप सरकार ने डिस्कॉम के कैग ऑडिट की कोशिश को 2015 में उच्च न्यायालय ने रोक दिया था।
आदेश के अनुसार, 29 जून को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई दिल्ली मंत्रिमंडल की बैठक में जनहित में उन हालात की 'गहन' कैग ऑडिट की सिफारिश की गई, जिनमें डिस्कॉम 'रेगुलेटरी एसेट्स' की वसूली किए बिना काम करती रहीं।
बिजली मंत्री आशीष सूद ने बृहस्पतिवार को कहा कि डिस्कॉम की कैग ऑडिट का औपचारिक आदेश दिल्ली के बिजली क्षेत्र में 'पारदर्शिता, जवाबदेही और कामकाज में सुधारों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण' है।
उन्होंने कहा कि यह दिल्ली के हर बिजली उपभोक्ता और हर ईमानदार करदाता की जीत है।
सूद ने कहा, ''दिल्ली के लोगों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि लगभग 38,000 करोड़ रुपये की 'रेगुलेटरी एसेट्स' कैसे बढ़ती गईं और इससे किसे फायदा हुआ....। कैग ऑडिट सच्चाई सामने लाएगा।''
भाषा रमण अजय
अजय
0207 1955 दिल्ली