तमिलनाडु: विपक्षी नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात की, मंत्रिमंडल की बैठक से जुड़ा मुद्दा उठाया
सुभाष
- 04 Jul 2026, 10:20 PM
- Updated: 10:20 PM
चेन्नई, चार जुलाई (भाषा) तमिलनाडु में द्रमुक, अन्नाद्रमुक और भाजपा के नेताओं ने शनिवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर टीवीके सरकार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
विपक्षी दलों ने सरकार पर विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त कर बड़े पैमाने पर दलबदल कराने और मंत्रिमंडल की बैठक में अनधिकृत व्यक्तियों को शामिल करने का आरोप लगाया।
राज्यपाल ने बताया कि द्रमुक के प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपकर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की कथित अवैध गिरफ्तारी, हिरासत में उत्पीड़न करने तथा पुलिस के दुरुपयोग के जरिए दलबदल कराने के प्रयासों को लेकर गंभीर चिंता जताई।
उन्होंने बताया कि ज्ञापन में विधायकों को दलबदल करने के लिए कथित तौर पर प्रलोभन दिए जाने और सरकारी बैठकों में अनधिकृत व्यक्तियों की भागीदारी का भी मुद्दा उठाया गया है।
आर्लेकर ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक बयान में कहा, ''द्रमुक ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए तत्काल संवैधानिक हस्तक्षेप, स्वतंत्र जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।''
राज्यपाल ने कहा, ''अन्नाद्रमुक ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठकों और गोपनीय सरकारी विचार-विमर्श में निजी व्यक्तियों की कथित भागीदारी की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की है।''
भाजपा ने अपने ज्ञापन में कहा कि मंत्रियों के अलावा दो निजी व्यक्ति हाल में हुई तमिलनाडु मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल हुए, जो ''गोपनीयता की शपथ का उल्लंघन'' है।
लोक भवन द्वारा जारी बयान में कहा गया कि भाजपा ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए राज्यपाल से मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
भाजपा ने राज्यपाल से मुख्यमंत्री को यह सुनिश्चित करने की सलाह देने का भी अनुरोध किया कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
पार्टी ने राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन के एक नाबालिग लड़की के साथ कथित अनुचित व्यवहार की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
बाद में अन्नाद्रमुक नेता एग्री कृष्णमूर्ति और पार्टी सांसद इनबथुरई ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने राज्यपाल से दलबदल के मामलों की जांच कर राजनीतिक शुचिता बनाए रखने के लिए अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करने का आग्रह किया है।
इनबथुरई ने कहा, ''राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 167 के तहत मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मंत्रिमंडल की गोपनीयता भंग होने तथा सरकारी आचरण से जुड़े आरोपों पर जवाब तलब करना चाहिए। यदि सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं होता है, तो राज्यपाल केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेज सकते हैं, जिससे अनुच्छेद 356 के तहत हस्तक्षेप की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।''
1991 में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने के आधार पर तत्कालीन एम. करुणानिधि सरकार को बर्खास्त किए जाने का उल्लेख करते हुए कृष्णमूर्ति ने दावा किया कि मौजूदा स्थिति भी वैसी ही प्रतीत होती है, क्योंकि अनधिकृत व्यक्तियों की मंत्रिमंडल की बैठकों में मौजूदगी से सरकारी गोपनीयता और संवैधानिक मानदंडों का उल्लंघन हो रहा है तथा ''संवैधानिक व्यवस्था के विफल होने की आशंका'' पैदा हो गई है।
उन्होंने कहा कि विधायकों को अपने पक्ष में करने की कोशिश संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी कानून का उल्लंघन है।
कृष्णमूर्ति ने विश्वास जताया कि राज्यपाल कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करेंगे।
अन्नाद्रमुक के प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ टीवीके विधायकों और पार्टी नेताओं को अपने पक्ष में करने के लिए खरीद-फरोख्त में लिप्त है, जिसके कारण पार्टी से बड़े पैमाने पर दलबदल हो रहा है।
नेताओं ने तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि जो विधायक इस्तीफा दे रहे हैं, उन्हें उस निर्वाचन क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव में उम्मीदवार बनने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, जहां से वे अन्नाद्रमुक के टिकट पर निर्वाचित हुए थे।
द्रमुक के संगठन सचिव आर. एस. भारती के साथ पार्टी सांसद पी. विल्सन, नेता एस. ऑस्टिन और आई. परंथामेन भी थे।
भारती ने बाद में संवाददाताओं से कहा, ''मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में तिरुचेंदूर से विधायक अनीता आर. राधाकृष्णन की गिरफ्तारी राजनीतिक शक्ति के दुरुपयोग का उदाहरण है।''
इससे पहले, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने टीवीके के चुनावी रणनीतिकार जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि इन ''अनधिकृत व्यक्तियों'' ने मंत्रिमंडल की बैठक में हिस्सा लेकर प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है।
नागेंद्रन ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद कहा, ''मैंने राज्यपाल आर्लेकर से उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।''
विपक्षी भाजपा और द्रमुक का आरोप है कि कुछ व्यक्ति सत्ता के बेहद करीब पहुंच गए हैं, वहीं सत्तारूढ़ टीवीके ने स्पष्ट किया है कि अरोकियासामी और रेड्डी दोनों को मुख्यमंत्री का विशेष सलाहकार नियुक्त किया गया है, इसलिए उन्हें निजी व्यक्ति नहीं माना जा सकता।
कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नागेंद्रन ने कहा कि टीवीके के सत्ता में आने के बाद 54 दिन में आपराधिक घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिनमें यौन उत्पीड़न के 151 और हत्या के 85 मामले शामिल हैं।
भाषा राखी सुभाष
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