कर्नाटक के मंत्री खंड्रे ने एचएमटी वन भूमि पर कुमारस्वामी के आरोपों को खारिज किया
अविनाश
- 07 Jul 2026, 05:54 PM
- Updated: 05:54 PM
बीदर, सात जुलाई (भाषा) कर्नाटक सरकार में मंत्री ईश्वर खंड्रे ने एचएमटी वन भूमि को लेकर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी की ओर से लगाए गए आरोपों को मंगलवार को खारिज कर दिया। खंड्रे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली एचएमटी ने आरक्षित वन भूमि को भू-उपयोग में बदलाव के बिना अवैध रूप से रियल एस्टेट कंपनियों को बेच दिया।
ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री खंड्रे ने कहा कि वन विभाग ने एचएमटी की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। उन्होंने संबंधित भूमि पर किसी भी तरह की रियल एस्टेट गतिविधि से इनकार किया।
कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली सरकार में खंड्रे के पास वन विभाग भी था।
वन विभाग के एचएमटी की जमीन पर कब्जा करने और कर्नाटक सरकार के रियल एस्टेट गतिविधियों को बढ़ावा देने के कुमारस्वामी के आरोपों पर संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए खंड्रे ने कहा कि उस जमीन पर वन विभाग ने नहीं, बल्कि एचएमटी ने कब्जा किया है, जिसके भू-उपयोग में कानूनी तौर पर कभी भी बदलाव नहीं हुआ।
खंड्रे ने सवाल उठाया कि कर्नाटक वन अधिनियम-1963 की धारा-64ए के तहत जमीन की स्थिति को वन भूमि के तौर पर बहाल किए जाने के बाद वहां रियल एस्टेट गतिविधियां कैसे मुमकिन हो सकती हैं।
उन्होंने दावा किया कि कुछ अधिकारियों ने उच्चतम न्यायालय में एक अंतरिम अर्जी दायर की थी, जिसमें एचएमटी के कब्जे वाली वन भूमि को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय समिति, वन मंत्री या राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बिना ही गैर-अधिसूचित करने का अनुरोध किया गया था।
खंड्रे ने कहा, "संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया और उन्हें 'कारण बताओ नोटिस' जारी किए गए। मंत्रिमंडल ने अंतरिम अर्जी वापस लिए जाने को भी मंजूरी दे दी और यह मामला उच्चतम न्यायालय के समक्ष उठाया गया।"
मंत्री ने कहा कि शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया कि वन (संरक्षण) अधिनियम-1980 के लागू होने से पहले जिस भी वन भूमि का स्वरूप नहीं बदला गया था, वह वन भूमि ही बनी रहेगी।
उन्होंने कहा, "इसलिए एचएमटी की जिस जमीन की बात हो रही है, उसे वन भूमि ही माना जाएगा।"
कुमारस्वामी के इस दावे का जिक्र करते हुए कि एचएमटी की जमीन पर केवल इमारतें हैं और कोई वन नहीं है, खंड्रे ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों के साथ खुद उस जगह का दौरा किया था और एचएमटी अधिकारियों ने गुलदस्ता देकर उनका स्वागत किया था।
खंड्रे ने सवाल किया, "तब भी कुमारस्वामी ने आरोप लगाया था कि मैंने एचएमटी परिसर में बिना इजाजत प्रवेश किया। अगर एचएमटी के अधिकारियों ने खुद मेरा स्वागत किया और मुझे अंदर ले गए, तो इसे बिना इजाजत प्रवेश कैसे कहा जा सकता है?"
उन्होंने दावा किया कि एचएमटी के कब्जे वाली जमीन के लगभग 280 एकड़ हिस्से पर अब भी जंगल सरीखा वृक्ष आवरण मौजूद है।
खंड्रे ने कहा कि आसपास की खाली पड़ी इमारतों का इस्तेमाल फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों की शूटिंग के लिए किया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एचएमटी व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए गैर-कानूनी तरीके से वन भूमि का इस्तेमाल कर रही है और उसने 165 एकड़ जमीन सिर्फ 300 करोड़ रुपये में बेच दी।
खंड्रे ने कुमारस्वामी को उस जगह का दौरा करने और तथ्यों की पुष्टि करने की चुनौती दी।
उन्होंने दावा किया कि एचएमटी के कब्जे वाली वन भूमि कर्नाटक के सात करोड़ लोगों की है और यह बेंगलुरु के लिए "हरियाली के एक अहम स्रोत" के रूप में काम करती है।
खंड्रे ने कहा, "सरकार का दृष्टिकोण 444 एकड़ में फैला एक विशाल जैवविविधता पार्क विकसित करना है, जो लालबाग और कब्बन पार्क से भी बड़ा होगा और इसकी घोषणा पहले ही सार्वजनिक रूप से की जा चुकी है। इसलिए कुमारस्वामी के रियल एस्टेट से जुड़ी साजिश के आरोप बेबुनियाद हैं।"
मंत्री ने कहा कि अगर कुमारस्वामी को सचमुच कर्नाटक की चिंता है, तो उन्हें पिछड़े कल्याण-कर्नाटक इलाके में बड़े उद्योग लगाने में मदद करनी चाहिए, ताकि रोजगार के अवसर पैदा हो सकें।
खंड्रे ने कुमारस्वामी से आग्रह किया कि वह सबसे पहले बल्लारी जिले में प्रस्तावित एनएमडीसी इस्पात संयंत्र परियोजना और भद्रावती स्थित विश्वेश्वरैया लौह और इस्पात संयंत्र को फिर से शुरू करें, जो केंद्रीय इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं।
मंत्री ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में दाखिल किए गए एक हलफनामे में हिंदुस्तान मशीन टूल्स (एचएमटी) ने खुद बेंगलुरु में मौजूद वन भूमि की कीमत लगभग 14,000 करोड़ रुपये आंकी थी।
उन्होंने कहा, "जिन लोगों की नजर इस कीमती जमीन पर है, वे खुद तय कर सकते हैं कि असल में इसमें किसकी दिलचस्पी है।"
खंड्रे ने पूछा कि कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड के लिए बेंगलुरु में कीमती वन भूमि किसने अधिग्रहित की थी। उन्होंने कहा कि वन मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बेंगलुरु में लगभग 10,000 करोड़ रुपये की वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया था और वहां पेड़-पौधे लगाए थे।
खंड्रे ने कहा कि हेसरघट्टा झील इलाके के आसपास की 5,678 एकड़ जमीन को 'ग्रेटर हेसरघट्टा संरक्षित घास का मैदान' घोषित किया गया है, ताकि यह जमीन रियल एस्टेट डेवलपर के हाथों में न जाए।
भाषा पारुल अविनाश
अविनाश
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