बेंगलुरु में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध में फेरीवालों ने बुधवार को बंद का आह्वान किया
अविनाश
- 07 Jul 2026, 10:21 PM
- Updated: 10:21 PM
बेंगलुरु, सात जुलाई (भाषा) कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में अतिक्रमण हटाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के विरोध में फेरीवालों के संगठनों ने बुधवार को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और अपनी गतिविधियां पूरी तरह बंद रखने का आह्वान किया है।
संगठनों ने राज्य सरकार पर 'फेरीवाला (आजीविका संरक्षण और फेरी लगाने का विनियमन) अधिनियम, 2014' का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
फेरीवालों से जुड़े अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता विनय श्रीनिवास ने संवाददाताओं से कहा, ''आठ जुलाई को हमने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस दिन बंद रहेगा। शहर के सभी प्रमुख बाजारों में फेरी लगाने का काम बंद रहेगा। हम उन फेरीवालों से भी अपील करते हैं जो किसी संगठन से जुड़े नहीं हैं कि वे भी हमारे साथ आएं।''
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अभी शुरुआत है। यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो पूरे राज्य में आंदोलन किया जाएगा।
श्रीनिवास ने कहा कि आठ जुलाई को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में होने वाले प्रदर्शन में पांच से छह हजार लोगों के जुटने की संभावना है।
ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (जीबीए) के एक जुलाई से शुरू हुए 'सुरक्षित फुटपाथ' अभियान के तहत अधिकारी पूरे शहर में पैदल यात्रियों के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार के उद्देश्य से अतिक्रमण हटा रहे हैं।
इस अभियान का नेतृत्व ग्रेटर बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा कर रहे हैं।
गौड़ा ने हाल में कहा था कि फिलहाल यह अभियान बेंगलुरु की प्रमुख सड़कों के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से तक सीमित है, जहां पैदल यात्रियों की आवाजाही सबसे अधिक होती है। उन्होंने कहा था कि अन्य सड़कों पर कानून के अनुरूप व्यावसायिक गतिविधियां और फेरी लगाने का काम जारी रह सकता है।
उन्होंने कहा था कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता पैदल यात्रियों की सुरक्षा है। उनके अनुसार, हर साल सैकड़ों पैदल यात्रियों की सड़क दुर्घटनाओं में इसलिए मौत हो जाती है क्योंकि फुटपाथ अवरुद्ध होने या इस्तेमाल योग्य नहीं रहने के कारण उन्हें सड़क पर चलना पड़ता है।
मंत्री ने यह भी कहा था कि यह अभियान उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप चलाया जा रहा है।
गौड़ा ने यह भी स्पष्ट किया था कि जीबीए क्षेत्र के फेरीवालों को हटाया नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें प्रमुख सड़कों से वार्ड स्तर की सड़कों पर स्थानांतरित किया जाएगा।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रीनिवास ने कहा कि कानून के अनुसार केवल ''टाउन वेंडिंग कमेटी'' को ही फेरीवाला-मुक्त क्षेत्र घोषित करने का अधिकार है और ऐसा करने से पहले फेरीवालों का पुनर्वास किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस नियम का पालन नहीं किया गया है।
उन्होंने प्रशासन के फेरीवालों को दूसरी सड़कों पर स्थानांतरित करने के निर्देश को अव्यावहारिक बताते हुए कहा, ''किस दूसरी सड़क पर जाएं? अगर वहां फुटपाथ छोटे हों तो क्या किया जाए? यह सरकार की गरीब विरोधी नीति है।''
श्रीनिवास ने कहा कि फेरीवाले भी शहर को स्वच्छ रखने के पक्षधर हैं और शहर में कचरे की समस्या का समाधान नहीं करने के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।
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