राम मंदिर मामले में श्रद्धालुओं से धन एकत्र करने के लिए फर्जी रसीदों का इस्तेमाल करते थे आरोपी: पुलिस
जोहेब
- 08 Jul 2026, 10:24 PM
- Updated: 10:24 PM
अयोध्या, आठ जुलाई (भाषा) राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपियों ने श्रद्धालुओं से धन एकत्र करने के लिए फर्जी रसीदों का इस्तेमाल किया था। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बुधवार को तीन आरोपियों अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया, जब एक स्थानीय अदालत ने उनकी हिरासत को मंजूरी दी।
सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के दौरान पुलिस ने एक पुरानी फर्जी रसीद बुक बरामद की, जो ट्रस्ट की पुरानी दान रसीदों जैसी दिखती है।
सूत्रों के अनुसार, तीनों आरोपियों ने जांचकर्ताओं को बताया कि उन्होंने और एक अन्य आरोपी टिन्नू यादव ने शुरुआत में मंदिर में दान देने के इच्छुक श्रद्धालुओं से धन एकत्र करने के लिए इन फर्जी रसीदों का इस्तेमाल किया था।
पुलिस ने बताया कि रसीदें असली रसीदों से काफी मिलती-जुलती थीं और उन पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का लोगो भी था, जिससे श्रद्धालुओं के लिए उनकी पहचान करना मुश्किल था।
आरोप है कि ट्रस्ट द्वारा ऑनलाइन रसीद प्रणाली शुरू किए जाने के बाद उन्होंने इस रसीद बुक का इस्तेमाल बंद कर दिया।
एक सप्ताह पहले पुलिस ने अयोध्या के एक योग केंद्र से "रामराज्य कोष" नाम का एक दान पात्र जब्त किया था, जिस पर भुगतान के लिए सक्रिय क्यूआर कोड लगा हुआ था।
आरोप है कि मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला पिछले 10 वर्ष से उसी योग केंद्र में रह रहा था।
जांच के तहत पुलिस तीनों आरोपियों को 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के जौरा क्षेत्र में भी ले गई। जांचकर्ताओं को संदेह है कि वहां चोरी की गई नकदी की गिनती करके उसका बंटवारा किया जाता था।
पुलिस ने अयोध्या के मिल्कीपुर क्षेत्र में छापेमारी करते हुए अनुकल्प मिश्रा के रिश्तेदारों से जुड़े परिसरों, एक सर्राफा व्यापारी और इनायतनगर के एक भवन निर्माण सामग्री कारोबारी के यहां तलाशी ली।
सूत्रों ने बताया कि जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि आरोपियों द्वारा कथित रूप से खरीदी गईं संपत्तियों या सामान के भुगतान नकद किए गए थे या डिजिटल माध्यम से।
इसके अलावा, विशेष जांच दल (एसआईटी) ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बड़े खर्चों से जुड़े बिलों और वाउचरों की भी जांच शुरू कर दी है।
कथित चढ़ावा चोरी मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच के दौरान 40 दिन की अवधि में चोरी की करीब 70 संदिग्ध घटनाओं के बारे में पता चला है।
एसआईटी आरोपियों की भूमिका के साथ-साथ मंदिर की दान राशि गिनने की व्यवस्था में कथित प्रक्रियागत और सुरक्षा संबंधी गड़बड़ियों की भी जांच कर रही है।
भाषा सं जफर जोहेब
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