भारतीय कानूनों के प्रति जवाबदेही से बच नहीं सकते सोशल मीडिया मंच: उच्च न्यायालय
जितेंद्र
- 08 Jul 2026, 10:41 PM
- Updated: 10:41 PM
प्रयागराज, आठ जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि सोशल मीडिया मंच भारतीय कानूनों और देश की जांच एजेंसियों के प्रति अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते।
अदालत ने कहा कि भारतीय कानून के हाथ इतने लंबे हैं कि वे किसी भी उल्लंघन तक पहुंच सकते हैं और इतने सक्षम हैं कि दोषियों को सजा दिला सकते हैं। न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ 'एक्स' पर कथित अश्लील वीडियो व तस्वीरें पोस्ट किए जाने से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी।
मामले की जांच कर रहे अधिकारी ने अदालत को बताया कि 'एक्स' याचिकाकर्ता के कथित अश्लील वीडियो और तस्वीरें पोस्ट किए जाने से संबंधित यूआरएल आईडी और आईपी एड्रेस उपलब्ध नहीं करा रहा है, जिसके बाद पीठ ने यह टिप्पणी की। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि ऐसी स्थिति में वह मामले में आगे बढ़ने में असमर्थ है।
उन्होंने अदालत से जांच पूरी करने और तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए और समय दिए जाने का अनुरोध किया।
खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया इसे पुलिसिंग की विफलता बताते हुए गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त को 12 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।
अदालत ने उनसे यह भी बताने को कहा कि 'एक्स' के जिम्मेदार अधिकारियों को पुलिस जांच में सहयोग करने के लिए बाध्य करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
अदालत ने कहा, "'एक्स' के वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग से इनकार करने के कारण पुलिस जांच रुक गई है। असहयोग का यह ऐसा मामला है जिसे यह अदालत बर्दाश्त नहीं कर सकती।"
खंडपीठ ने कहा, "प्रथम दृष्टया हलफनामे से पुलिसिंग में विफलता स्वीकार किए जाने का संकेत मिलता है। प्रथम दृष्टया 'एक्स' के जिम्मेदार अधिकारियों ने पुलिस जांच में बाधा डाली है और जांच में कानूनी दायित्वों का पालन नहीं किया गया है। उनके आचरण से अपराधी न्याय से बच सकते हैं।"
मामले में याचिकाकर्ता मिथिलेश कुमार ने गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि 'एक्स' पर उनके अश्लील वीडियो पोस्ट किए गए। मिथिलेश कुमार ने मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग को लेकर उच्च न्यायालय का रुख किया था।
अदालत ने दो जुलाई के अपने आदेश में आदेश की एक प्रति उत्तर प्रदेश सरकार के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को भेजने का निर्देश दिया था।
भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र
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