विदेशी बाजारों में तेजी से बीते सप्ताह सभी खाद्य तेल-तिलहनों के दाम में सुधार
अजय
- 12 Jul 2026, 09:44 AM
- Updated: 09:44 AM
नयी दिल्ली, 12 जुलाई (भाषा) विदेशी बाजारों में बीते सप्ताह ज्यादातर समय तेजी का रुख रहने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजारों में सभी तेल-तिलहनों के दाम में मजबूती रही। इसके कारण सरसों, मूंगफली एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम बढ़त के साथ बंद हुए।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि विदेशों में सुधार के अलावा बाजार में आवक घटने के कारण भी बीते सप्ताह तेल-तिलहन कीमतों में सुधार आया। रुपये के कमजोर रहने से भी विशेषकर आयातित खाद्य तेलों के दाम ऊंचे रहे। आयातित तेलों के संदर्भ में सुधार का एक और कारण यह भी है कि जो आयातक पहले लागत से तीन-चार प्रतिशत नीचे दाम पर खाद्य तेलों की बिक्री कर रहे थे, वह अब घटकर मात्र एक-डेढ़ प्रतिशत ही रह गया है। लागत से नीचे बिकवाली होने के बावजूद घाटे का अंतर कम होने से भी आयातित खाद्य तेलों के दाम में सुधार आया।
सूत्रों ने कहा कि मौजूदा समय में सोयाबीन रिफाइंड और पाम-पामोलीन तेल से सूरजमुखी तेल लगभग 20 रुपये किलो, मूंगफली तेल से लगभग 15 रुपये किलो और सरसों तेल से लगभग 8-10 रुपये किलो महंगा बैठता है। इन सब कारणों से आयातित तेलों में सुधार आया।
सोयाबीन रिफाइंड और पाम पामोलीन की औद्योगिक मांग भी बढ़ रही है। किसानों को ऊंचे दाम का लाभ मिल चुका है और नीचे दाम पर बिकवाली से बचने के लिए वे बाजार में आवक कम ला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सस्ता होने और औद्योगिक मांग के कारण बीते सप्ताह पाम-पामोलीन तेल के दाम भी सुधार के साथ बंद हुए।
उन्होंने बताया कि कम आवक की स्थिति ऐसी है कि महाराष्ट्र के लातूर में सोयाबीन प्लांट वालों ने किसानों को संभवत: आकर्षित करने के मकसद से 15-30 अगस्त तक के लिए सोयाबीन का खरीद दाम बढ़ाकर 7,750 रुपये क्विंटल कर दिया है।
सूत्रों ने कहा कि सरसों के मामले में भी किसान कम आवक बाजार में ला रहे हैं। आवक कम होने की वजह से बीते सप्ताह सरसों तेल-तिलहन में सुधार आया। लेकिन तथ्य यह भी है कि सरसों के महंगा होने के कारण इसकी लिवाली अपेक्षा के अनुरूप नहीं है।
मूंगफली की औद्योगिक मांग होने से बीते सप्ताह मूंगफली तेल-तिलहन में भी सुधार आया। मूंगफली का दाम सूरजमुखी से पर्याप्त नीचे है और बिनौले की उपलब्धता नहीं के बराबर है। इन खाद्य तेलों की कमी को फिलहाल मूंगफली ही पूरी कर रहा है जिसकी वजह से इसमें सुधार आया। कम उपलब्धता के कारण बीते सप्ताह बिनौला तेल में भी सुधार आया।
सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 200 रुपये के सुधार के साथ 7,725-7,750 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों तेल 375 रुपये के सुधार के साथ 15,900 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल क्रमश: 50-55 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 2,615-2,715 रुपये और 2,615-2,765 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज का थोक भाव क्रमश: 175-175 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 7,175-7,225 रुपये और 7,025-7,100 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 150 रुपये के सुधार के साथ 15,550 रुपये प्रति क्विंटल, सोयाबीन इंदौर तेल 50 रुपये के सुधार के साथ 15,300 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल 75 रुपये के सुधार के साथ 12,050 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
औद्योगिक मांग रहने के बीच बीते सप्ताह मूंगफली तिलहन का दाम 200 रुपये के सुधार के साथ 6,950-7,525 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 375 रुपये के सुधार के साथ 16,000 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 60 रुपये के सुधार के साथ 2,560-2,860 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।
लागत से नीचे दाम पर बिकवाली का अंतर पहले के मुकाबले घटने के कारण समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम 225 रुपये के सुधार के साथ 13,625 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। पामोलीन दिल्ली 125 रुपये के सुधार के साथ 15,525 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल 150 रुपये के सुधार के साथ 14,325 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
औद्योगिक मांग के बीच बिनौला तेल का दाम भी 150 रुपये के सुधार के साथ 16,000 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
भाषा राजेश
अजय
अजय
1207 0944 दिल्ली