एसआईआर को लेकर असमंजस का सामना कर रहे प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित बस्तियों से हटाए गए परिवार
माधव
- 18 Jul 2026, 05:41 PM
- Updated: 05:41 PM
(मानसी जगानी)
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) लल्लू जैक (77) को पिछले महीने दिल्ली के रेस कोर्स के पास स्थित अपना घर टूटने के बाद जब वहां से हटना पड़ा, तो उन्हें लगा था कि सबसे बड़ी चुनौती नयी जगह पर फिर से जिंदगी शुरू करनी होगी।
सावदा घेवरा में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) के फ्लैट में अभी रह रहे दुकानदार लल्लू जैक को अब एक सवाल परेशान कर रहा है कि उन्हें मतदाता सूची से जुड़ा फॉर्म कौन देगा और उसमें कौन-सा पता लिखना होगा।
लल्लू जैक का परिवार उन सैकड़ों परिवारों में शामिल है, जिन्हें 14 जून को हुई तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद भाई राम (बीआर) कैंप, डीआईडी कैंप और मस्जिद कैंप से हटाया गया था। ये परिवार अब पुनर्वास कॉलोनी में नयी जिंदगी शुरू कर रहे हैं, लेकिन दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण कई लोग यह नहीं समझ पा रहे कि उन्हें यह प्रक्रिया पुराने पते से पूरी करनी है या नए पते से।
लल्लू जैक ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "पड़ोसियों ने हमें बताया कि हम वापस बीआर कैंप जाएं, वहां से गणना फॉर्म लें और उसे भरें। लेकिन उसमें कौन-सा पता लिखें? हमारा घर तो वहां टूट चुका है।"
उन्होंने कहा कि पुराना इलाका लगभग 45 किलोमीटर दूर है और वहां सिर्फ जाने में ही 500 रुपये खर्च हो जाते हैं।
उन्होंने कहा, "सिर्फ फॉर्म लेने और जमा करने के लिए इतना पैसा कैसे खर्च करें? अगर यह काम यहीं हो जाए तो बहुत आसानी होगी।"
लल्लू जैक की पत्नी उमा देवी (73) के लिए यात्रा करना भी मुश्किल है। उनके दोनों पैरों में काफी सूजन रहती है, इसलिए वह बहुत कम घर से बाहर निकलती हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले साल विधानसभा चुनाव में वह वोट नहीं डाल सकीं क्योंकि मतदान केंद्र पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उनका नाम पहले ही मतदाता सूची से हटा दिया गया था।
उन्होंने कहा, "मुझे कभी नहीं बताया गया कि मेरा नाम हटा दिया गया है। इसका पता मुझे वोट डालने पहुंचने पर चला।"
सावदा घेवरा की पुनर्वास कॉलोनी में रहने वाले कई परिवार भी इसी तरह की उलझन में हैं। उनका कहना है कि उन्हें अलग-अलग लोगों से अलग-अलग सलाह मिली है कि एसआईआर की प्रक्रिया पुराने टूटे हुए घर के पते से पूरी करें या नए पते से।
तीन जून से शुरू हुए एसआईआर अभियान के तहत 13,000 से अधिक बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर गणना फॉर्म बांट रहे हैं और मतदाताओं की जानकारी जुटा रहे हैं। यह अभियान पहले 29 जुलाई तक चलना था, लेकिन अब इसे आठ अगस्त तक बढ़ा दिया गया है।
अभियान शुरू होने से पहले दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आलोक कुमार ने हाल की तोड़फोड़ की घटनाओं से पैदा हुई समस्या को स्वीकार किया था।
उन्होंने कहा था कि जब बीएलओ टूटे हुए इलाकों में जाएंगे तो वहां लोगों की जगह खाली जमीन मिलेगी, इससे गणना फॉर्म बांटना और सत्यापन करना मुश्किल होगा।
उन्होंने कहा था कि ऐसे मामलों को "विशेष मामला" माना जाएगा और इस पर भारत निर्वाचन आयोग से चर्चा की जाएगी।
हालांकि, इलाके के लोगों का कहना है कि अब तक उन्हें इस बारे में कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिला है।
बीआर कैंप के एक बीएलओ मोहन ने कहा कि जिन लोगों ने दूसरी जगह घर ले लिया है, उनके नाम अभी मतदाता सूची से नहीं हटाए गए हैं।
मोहन ने बताया कि उन्होंने ऐसे लोगों को पता बदलने के लिए फॉर्म-8 भरने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा, "हमें निर्देश दिया गया है कि जिन लोगों के घर टूट चुके हैं या जिन्हें नए घर का आवंटन पत्र मिल चुका है, उन्हें गणना फॉर्म न दिया जाए। हालांकि किसी का नाम तुरंत नहीं हटाया जा रहा। फॉर्म-8 जमा होने और नए पते का सत्यापन होने के बाद मतदाता का नाम अपने आप नयी जगह की सूची में स्थानांतरित हो जाएगा।"
मोहन ने बताया कि जिन परिवारों का पुनर्वास हो चुका है, उन्हें पुराने क्षेत्र में गणना फॉर्म इसलिए नहीं दिया जा रहा क्योंकि वे अब उस विधानसभा क्षेत्र में नहीं आते।
उन्होंने कहा, "अगर हम यहां से उनका एसआईआर पूरा कर दें, तो उनका नाम हमारी ही मतदाता सूची में बना रहेगा। बाद में पता बदलने के बाद फिर उसे हटाना पड़ेगा। इसलिए जो लोग यहां से जा चुके हैं, उन्हें यहां शामिल नहीं किया जा रहा।"
हालांकि, कई लोगों ने कहा कि उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी और वे पड़ोसियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं से जानकारी लेकर काम कर रहे हैं।
कुछ लोगों ने यह शिकायत भी की कि पुनर्वास कॉलोनी के कुछ हिस्सों में मोबाइल नेटवर्क ठीक नहीं है। इससे जानकारी लेना और अधिकारियों से संपर्क करना मुश्किल हो रहा है।
इरम का परिवार 16 जून को रेस कोर्स इलाके से सावदा घेवरा आया था। उन्होंने बताया कि उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी तब मिली जब पुराने इलाके में रहने वाले एक स्थानीय कार्यकर्ता ने पुनर्वास कॉलोनी के लोगों को बताया।
उन्होंने कहा, "आज मेरे पिता वापस गए, गणना फॉर्म लिया और उसे जमा किया। अधिकारियों ने हमें कुछ नहीं बताया था। हमें इसकी जानकारी दूसरे निवासी से मिली।"
कुछ मामलों में स्थानीय कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों की कमी को पूरा किया।
आम आदमी पार्टी की बूथ लेवल एजेंट (बीएलए-2) शाइस्ता ने बताया कि एसआईआर शुरू होने से पहले ही उन्हें इस समस्या का अंदेशा हो गया था, इसलिए उन्होंने 23 जून को उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) से मिलकर अनुरोध किया था कि पुनर्वास कॉलोनी में भी गणना फॉर्म उपलब्ध कराए जाएं।
उन्होंने कहा, "ये परिवार एसआईआर शुरू होने से पहले ही यहां आ चुके थे। मैं नहीं चाहती थी कि सिर्फ पते को लेकर भ्रम की वजह से कोई इस प्रक्रिया से बाहर रह जाए।"
लोगों ने इस समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों से भी संपर्क किया है।
स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता सुरेंद्र पहले दिल्ली रेस क्लब में काम करते थे और बेदखली के नोटिस के बाद उनकी नौकरी चली गई। उन्होंने बताया कि लोगों ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया सावदा घेवरा से ही कराई जाए।
उन्होंने कहा, "हमने अनुरोध किया है कि एसआईआर की प्रक्रिया यहीं कराई जाए क्योंकि लोग यहां आ चुके हैं। हर छोटी प्रक्रिया के लिए पुराने इलाके तक बार-बार जाना परिवारों के लिए व्यावहारिक नहीं है।"
चौदह जून को दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद भाई राम कैंप, डीआईडी कैंप और मस्जिद कैंप में तोड़फोड़ की गई थी। अदालत ने प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित इन बस्तियों को हटाने और पात्र लोगों के पुनर्वास का आदेश दिया था।
अधिकारियों का कहना था कि यह जमीन सुरक्षा और रक्षा संबंधी ढांचे के लिए आवश्यक है।
भाषा जोहेब माधव
माधव
1807 1741 दिल्ली