सहयोगात्मक शिक्षा प्रणाली तैयार करने के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम करें राज्य: धर्मेंद्र प्रधान
अमित सुभाष
- 09 Jul 2024, 07:54 PM
- Updated: 07:54 PM
नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा के परिवेश को मजबूत करने के लिए राज्यों से केंद्र के साथ एक टीम के रूप में काम करने की मंगलवार को अपील की।
उन्होंने कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सर्वोत्तम परंपराओं का अनुकरण करना चाहिए और इसे बढ़ावा देने के लिए एक टीम के रूप में काम करने का आग्रह किया।
प्रधान ने शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समीक्षा बैठक में यह टिप्पणी की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की समीक्षा करना और इसका राज्यों में क्रियान्वयन करने के साथ-साथ मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं जैसे समग्र शिक्षा, पीएम श्री, पीएम पोषण, उल्लास आदि को नीति के साथ समायोजित करना था।
उन्होंने कहा, ‘‘शिक्षा के परिवेश को मजबूत करने के साथ-साथ सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में सर्वोत्तम परंपराओं का अनुकरण एवं उसे बढ़ावा देने के लिए राज्यों और केंद्र, दोनों को एक टीम के रूप में काम करना होगा। सभी हितधारकों को क्षमताओं को मजबूत करने, एक सहयोगात्मक शिक्षा प्रणाली बनाने और विकसित भारत के प्रमुख स्तंभ के रूप में शिक्षा का लाभ उठाने के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए।"
उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लगभग चार वर्षों में, देश में शिक्षा के परिवेश ने जबरदस्त प्रगति की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कार्यान्वयन भारत को ज्ञान की महाशक्ति बनाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान और समावेशी पहुंच प्रदान करने की कुंजी है।’’
भारतीय भाषाओं में शिक्षा के बारे में प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 मातृभाषा और सभी भारतीय भाषाओं में शिक्षा के महत्व पर जोर देती है। उन्होंने एनईपी की मूल भावना अर्थात शिक्षा मुहैया होना, समानता, गुणवत्ता, वहनीयता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत की एक बड़ी आबादी युवा है और हमारी चुनौती 21वीं सदी की दुनिया के लिए वैश्विक नागरिक तैयार करना है। विश्व तेजी से बदल रहा है क्योंकि यह सदी प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित हो रही है। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि एक ऐसी शिक्षा प्रणाली सुनिश्चित की जाए जो जमीनी और आधुनिक दोनों ही हो।’’
भाषा अमित