सिंधिया ने डाक विभाग की सौ दिवसीय कार्ययोजना की समीक्षा की
रमण अजय
- 09 Jul 2024, 09:56 PM
- Updated: 09:56 PM
नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को डाक विभाग की सौ दिवसीय कार्ययोजना की समीक्षा की। इसमें डाक चौपाल और मानकीकृत जियो-कोडिंग आधारित पते जैसे प्रमुख उपायों के लिए रूपरेखा और लक्ष्य शामिल हैं।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, डाक विभाग देश में एक पते के लिए मानकीकृत ‘जियो-कोडिंग’ आधारित व्यवस्था स्थापित करने की पहल को आगे बढ़ा रहा है। यह व्यवस्था जन-केंद्रित सार्वजनिक और निजी सेवाओं के वितरण के लिए पते से जुड़े मामले को सरल बनाती है।
‘जियो-कोडिंग’ पतों को भौगोलिक आधार यानी अक्षांश और देशांतर से जोड़ने की प्रक्रिया है।
बयान के अनुसार, यह ग्रिड-आधारित व्यवस्था भू-स्थानिक संचालन को लेकर एक मजबूत स्तंभ के रूप में काम करेगी। इससे सार्वजनिक सेवा वितरण में वृद्धि, तेज आपातकालीन प्रतिक्रिया और लॉजिस्टिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
बयान में कहा गया है, ‘‘ज्ञान सहायता साझेदारी स्थापित करने के लिए नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय) के साथ पांच जुलाई, 2024 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये हैं।’’
तकनीकी सहायता साझेदारी स्थापित करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) के साथ एक और समझौता ज्ञापन पर काम जारी है।
इसमें कहा गया है, ‘‘इन साझेदारियों का उद्देश्य सटीक ‘मैपिंग’ और पते की समस्या के समाधान के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों और विशेषज्ञता का लाभ उठाना है, जिससे अंततः देशभर में सेवा वितरण में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा।’’
इसके अलावा, डाक विभाग 100 दिन में देशभर में 5,000 डाक चौपाल का आयोजन करेगा और डाक घर निर्यात केंद्र पोर्टल पर 3,000 नये निर्यातकों को जोड़ने का भी लक्ष्य है।
बयान के अनुसार, ‘‘आज आयोजित एक समीक्षा बैठक में संचार और पूर्वोत्तर मामलों के मंत्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया ने डाक विभाग की 100-दिवसीय कार्ययोजना पर चर्चा की।’’ विभाग का लक्ष्य प्रमुख उपायों के जरिये सेवा डिलिवरी में महत्वपूर्ण बदलाव और दक्षता बढ़ाना है।’’
डाक चौपाल का मकसद आवश्यक सरकारी और जन-केंद्रित सेवाओं को सीधे ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाना और सुविधाजनक बनाना है। डाक चौपाल गांव के लोगों और सरकारी कार्यों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेंगे। इससे दूरी और पहुंच जैसी बाधाएं कम होंगी।
भाषा रमण