विधि मंत्रालय ने कुछ विधेयकों में सावधि खंड की वकालत की; इसे 100-दिवसीय एजेंडे में शामिल किया
अविनाश मनीषा
- 17 Jul 2024, 04:39 PM
- Updated: 04:39 PM
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) विधि मंत्रालय ने कुछ प्रकार के विधेयकों में सावधि (सनसेट) खंड या स्वत: निरस्तीकरण प्रावधान को शामिल करने की वकालत की है ताकि कानून की पुस्तकों में किसी तरह की अव्यवस्था नहीं हो। इसके साथ ही उसने इसे अपने 100-दिवसीय एजेंडे में शामिल किया है।
सावधि खंड मुख्यतया अस्थायी प्रकृति के कानूनों या बदलती स्थितियों से निपटने वाले कानूनों पर लागू होता है। उपयोगिता समाप्त होने पर वे कानून की पुस्तकों से हटा दिए जाते हैं।
विधि मंत्रालय के विधायी विभाग ने नए विधायी प्रस्ताव में सावधि खंड को अपने 100-दिवसीय एजेंडे का हिस्सा बनाते हुए कहा है कि संबंधित मंत्रालयों के परामर्श के बाद इस संबंध में कदम उठाए जाएंगे।
संसदीय चुनावों से पहले, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को अगली सरकार के लिए 100-दिवसीय एजेंडा तैयार करने का निर्देश दिया था।
पूर्व केंद्रीय विधि सचिव पी के मल्होत्रा ने बताया कि जब भी विधायिका - संसद या राज्य विधानमंडल - अपने द्वारा पारित किसी कानून की अवधि को सीमित करना चाहती है, तो वह नीतिगत तौर पर एक सावधि खंड शामिल कर सकती है। उन्होंने कहा कि इसमें यह प्रावधान हो सकता है कि एक निश्चित अवधि - आवश्यकता के आधार पर पांच या 10 वर्ष - बीत जाने के बाद संबंधित कानून स्वत: समाप्त हो जाएगा।
मल्होत्रा ने पीटीआई-भाषा से कहा कि विधायिका सावधि खंड के कारण निष्क्रिय हो चुके कानून को नया जीवन देने के लिए नया कानून पारित कर सकती है।
विधायी विभाग के अनुसार, वह संबंधित प्रशासनिक मंत्रालयों और विभागों के परामर्श से नए विधायी प्रस्ताव में सावधि खंड या स्वत: निरस्तीकरण उपबंध को शामिल करना चाहता है।
उसने कहा कि इस संबंध में प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मल्होत्रा ने कहा, "यह मांग लंबे समय से की जा रही है। यह चलन कुछ अन्य देशों में भी है। मुझे लगता है कि ऐसे कई कानून हैं, जिनमें इस तरह का खंड रखा जा सकता है, ताकि संसद या राज्य विधानमंडल भी सतर्क रहें कि समय बीतने के साथ, अगर किसी कानून को बनाए रखने की जरूरत है, तो वे इसे नए सिरे से देखेंगे।’’
उन्होंने कहा, "और अगर वे इसे आगे जारी नहीं रखना चाहते हैं, तो कानून में निर्दिष्ट दिन से यह स्वत: खत्म हो जाएगा।"
हाल के दिनों में, कानूनी सुधारों पर विचार करने के लिए गठित कुछ आयोगों ने भी इस तरह के खंड को शामिल करने की बात की है।
भाषा अविनाश