वाल्मीकि कारपोरेशन के धन का इस्तेमाल आम चुनाव से पहले शराब खरीदने में हुआ : ईडी
प्रशांत माधव
- 17 Jul 2024, 09:31 PM
- Updated: 09:31 PM
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड से “दुरुपयोग” की गयी “काफी” धनराशि का उपयोग हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों के दौरान शराब के अलावा कुछ महंगे वाहनों की खरीद में किया गया।
संघीय जांच एजेंसी ने इस मामले में कांग्रेस विधायक और राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री बी. नागेंद्र को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने हाल ही में एक बयान जारी कर आरोप लगाया है कि विधायक से जुड़े लोग “धन के दुरुपयोग और नकदी प्रबंधन में संलिप्त हैं।”
पूर्व आदिवासी कल्याण एवं खेल मंत्री नागेंद्र को पिछले सप्ताह प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। ईडी द्वारा उनके और बेंगलुरु में रायचूर ग्रामीण सीट से कांग्रेस विधायक बसनगौड़ा दद्दाल के खिलाफ छापेमारी के बाद यह गिरफ्तारी की गयी थी।
पूर्व मंत्री 18 जुलाई तक ईडी की हिरासत में हैं।
एजेंसी ने दावा किया कि जांच में पाया गया कि “वाल्मीकि निगम के धन से लगभग 90 करोड़ रुपये आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 18 फर्जी खातों में भेजे गए। इसके बाद इस धनराशि को फर्जी और मुखौटा खातों के माध्यम से आरोपियों के बीच नकदी और सोना के तौर पर वितरित किया गया।”
ईडी ने कहा, “घोटाले के उजागर होने के बाद पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र ने भी इस्तीफा दे दिया।”
इसमें कहा गया है कि “आम चुनावों से ठीक पहले बड़ी मात्रा में शराब खरीदने के लिए काफी मात्रा में धन का उपयोग किया गया था।”
आम चुनाव अप्रैल-मई के दौरान हुए और परिणाम चार जून को घोषित किये गये।
नागेन्द्र और दद्दाल (निगम के अध्यक्ष) के परिसरों की तलाशी के दौरान, ईडी ने “हाल के आम चुनावों के दौरान धन के हेरफेर से जुड़े कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए।”
उसने कहा, “इसके अतिरिक्त, बी. नागेन्द्र से निकट रूप से जुड़े सहयोगियों को भी धन के दुरुपयोग और नकदी प्रबंधन में संलिप्त पाया गया।”
एजेंसी ने कहा कि इन अवैध धनराशियों के संचालन से संबंधित कुछ “अपराध-सिद्ध” साक्ष्य भी दद्दाल के आवास से बरामद किए गए।
कथित घोटाला तब सामने आया जब निगम के लेखा अधीक्षक चंद्रशेखरन पी. 21 मई को मृत पाए गए। उन्होंने एक सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें निगम से विभिन्न बैंक खातों में अवैध रूप से धन हस्तांतरित करने का आरोप लगाया गया था।
इसके बाद दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। बढ़ते दबाव के चलते मंत्री नागेंद्र ने 29 मई को इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद कांग्रेस सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया, जिसने अब तक इस मामले के सिलसिले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है।
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