सात प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान मानसून पर निर्भर : नागेश्वरन
रमण अजय
- 22 Jul 2024, 08:16 PM
- Updated: 08:16 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने सोमवार को कहा कि आर्थिक समीक्षा में चालू वित्त वर्ष के लिए सात प्रतिशत तक की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने योग्य है। हालांकि, यह मानसून और वैश्विक स्तर पर वित्तीय जोखिम पर निर्भर करेगा।
आर्थिक समीक्षा में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 से 7.0 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया गया है। यह बीते वित्त वर्ष के 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर से कम है।
नागेश्वरन ने कहा, ‘‘हम निराशावादी नहीं है। वास्तव में हम आशावादी हैं। हम मानसून की प्रगति के संदर्भ में चुनौतियों को लेकर भी सतर्क हैं।’’
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में 2023-24 की आर्थिक समीक्षा पेश किये जाने के बाद नागेश्वरन ने यहां संवाददाताओं से कहा कि हमने सोच-विचार कर 6.5 से 7.0 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान रखा है और इसे हासिल किया जा सकता है। लेकिन यह इस बात पर निर्भर है कि मानसूनी बारिश कैसी होती है।
आर्थिक समीक्षा नागेश्वरन के नेतृत्व में अर्थशास्त्रियों की एक टीम ने तैयार की है। कुछ विश्लेषकों ने कहा है कि समीक्षा में वृद्धि के अनुमान को कम करके दिखाया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम वृद्धि दर का अनुमान लगाने को लेकर सतर्क रुख रखना चाहते हैं। इसीलिए हमने वित्त वर्ष 2024-25 में देश की आर्थिक वृद्धि 6.5 प्रतिशत से 7.0 प्रतिशत रहने के बीच रहने अनुमान जताया है।’’
नागेश्वन ने कहा, ‘‘हालांकि सात प्रतिशत वृद्धि दर हासिल की जा सकती है, लेकिन जिस तरह से मानसून का रुख है और वैश्विक स्तर पर अनिश्चित माहौल के साथ विकसित देशों में वित्तीय बाजार जोखिम तथा उसके भारत पर पड़ने प्रभाव को देखते हुए कुछ जोखिम भी हैं।’’
उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में तेजी आई है और निजी पूंजीगत व्यय बढ़ा है। भारत का विदेशी ऋण अनुपात अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है।
नागेश्वरन ने यह भी कहा कि मुद्रास्फीतिक दबाव नियंत्रण में है और मुख्य (कोर) मुद्रास्फीति चार प्रतिशत से काफी नीचे है। उन्होंने कहा कि भारत को हर साल 80 लाख नौकरियां पैदा करने की जरूरत है।
सीईए ने कहा कि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना प्रमुख क्षेत्रों में बहुत अच्छा प्रदर्शन करने लगी है। पीएलआई योजना 1.28 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने में सक्षम रही है। साथ ही इनसे 80 लाख नौकरियों का सृजन हुआ है।
भाषा रमण