हल्द्वानी के बनभूलपुरा के निवासियों ने पुनर्वास योजना पर उच्चतम न्यायालय के निर्देश को सराहा
सं दीप्ति खारी
- 24 Jul 2024, 09:38 PM
- Updated: 09:38 PM
हल्द्वानी (उत्तराखंड), 24 जुलाई (भाषा) हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र के निवासियों ने बुधवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय का राज्य सरकार को रेलवे की अतिक्रमित जमीन पर रहने वालों के पुनर्वास के लिए एक योजना दाखिल करने का निर्देश जनहित में है ।
उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्चतम न्यायालय चाहे जो भी निर्णय ले, वह उनके पक्ष में ही होगा।
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को उत्तराखंड की मुख्य सचिव को हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण करने वाले 50 हजार से अधिक लोगों के पुनर्वास के लिए केंद्र और रेलवे के साथ एक बैठक करने के निर्देश दिए।
शीर्ष अदालत, हल्द्वानी में रेलवे के दावे वाली 29 एकड़ जमीन से अतिक्रमण हटाए जाने के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर उसके द्वारा पांच जनवरी 2023 को लगाई गयी रोक हटाने के लिए केंद्र की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार को योजना बतानी होगी कि कैसे और कहां इन लोगों का पुनर्वास किया जाएगा।
बनभूलपुरा के निवासी और समाजवादी पार्टी (सपा) नेता अब्दुल मतीन ने कहा, ‘‘4365 परिवारों और 50,000 लोगों को रातोंरात बेदखल करना न्याय के सिद्धांत के विरूद्ध है। उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए अंतरिम निर्देश स्वागतयोग्य हैं।’’
एक स्थानीय निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता सरताज आलम ने कहा कि शीर्ष अदालत के निर्देश प्रशंसनीय हैं। अदालत चाहे जो भी निर्णय ले, वह निश्चित रूप से जनहित में ही होगा।’’
हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित ह्रदयेश ने कहा कि राज्य सरकार और रेलवे को गरीबों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर रेलवे गोला नदी के किनारे से सुरक्षा दीवार बनाती है तो उसे कहीं जमीन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। रेलवे और राज्य सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और माननीय उच्चतम न्यायालय की तरह गरीबों के हित में निर्णय लेना चाहिए।
रेलवे के अनुसार, जमीन पर 4365 अतिक्रमणकारी हैं। हालांकि, हल्द्वानी में ये लोग विरोध कर रहे हैं और उनका कहना है कि वे जमीन के सही हकदार हैं।
विवादित जमीन पर रहने वाले चार हजार से ज्यादा परिवारों में पचास हजार लोग हैं जिनमें से अधिकांश मुस्लिम हैं।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए अतिक्रमण हटाए जाने के आदेश पर शीर्ष अदालत ने पांच जनवरी 2023 को यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि यह एक ‘‘मानवीय मसला’’ है और 50 हजार से अधिक लोगों को रातोंरात बेदखल नहीं किया जा सकता।
भाषा सं दीप्ति