‘चूक का अहसास करने में सरकार को करीब पांच दशक लग गए’’: संघ से जुड़े मामले में मप्र उच्च न्यायालय
हर्ष नोमान
- 25 Jul 2024, 08:06 PM
- Updated: 08:06 PM
इंदौर, 25 जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार की “खिंचाई” करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार को अपनी इस चूक का अहसास करने में करीब पांच दशक लग गए कि “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सरीखे विश्वप्रसिद्ध संगठन” को सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रतिबंधित संगठनों की सूची में गलत तरह से शामिल किया गया था।
अदालत ने संघ की गतिविधियों में सरकारी कर्मचारियों के शामिल होने पर लगी रोक हटाने के सरकार के हालिया फैसले के हवाले से यह तल्ख टिप्पणी की।
उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति गजेंद्र सिंह ने केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी पुरुषोत्तम गुप्ता की रिट याचिका का निपटारा करते यह टिप्पणी की।
गुप्ता ने 19 सितंबर 2023 को उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियमों के साथ ही केंद्र सरकार के उन कार्यालय ज्ञापनों को चुनौती दी थी जो संघ की गतिविधियों में सरकारी कर्मचारियों के भाग लेने में बाधा बन रहे थे।
पीठ ने केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग और गृह मंत्रालय को निर्देश भी दिया कि वे अपनी आधिकारिक वेबसाइट के ‘होम पेज’ पर नौ जुलाई के उस कार्यालय ज्ञापन को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करे जिसके जरिये सरकारी कर्मचारियों के संघ की गतिविधियों में शामिल होने पर लगी रोक हटाई गई है।
अदालत ने इस ज्ञापन को देश भर में केंद्र सरकार के सभी विभागों और उपक्रमों को 15 दिन के भीतर भेजने का निर्देश भी दिया।
इंदौर में रहने वाले याचिकाकर्ता पुरुषोत्तम गुप्ता ने ‘‘पीटीआई-भाषा’’ से कहा,‘‘मैं संघ की गतिविधियों में सरकारी कर्मचारियों के शामिल होने पर लगी रोक हटाने के केंद्र सरकार के फैसले से जाहिर तौर पर खुश हूं। मेरे पिता संघ की शाखा में जाते थे और सेवानिवृत्ति के बाद मैं भी संघ की गतिविधियों से जुड़ना चाह रहा था।"
गुप्ता ने बताया कि वह केंद्रीय भण्डारण निगम के अधिकारी के पद से 2022 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने कहा, "अब मेरे जैसे हजारों लोगों के लिए संघ से जुड़ने की राह आसान हो गई है।"
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय द्वारा नौ जुलाई को जारी एक कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है कि यह निर्णय लिया गया है कि 30 नवंबर 1966, 25 जुलाई 1970 और 28 अक्टूबर 1980 के संबंधित कार्यालय ज्ञापनों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उल्लेख हटा दिया जाए।
भाषा हर्ष