उच्चतम न्यायालय अवैध रूप से धन उधार देने के कारोबार की पड़ताल करेगा
शफीक नेत्रपाल
- 26 Jul 2024, 10:03 PM
- Updated: 10:03 PM
नयी दिल्ली, 26 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने भारत में बिना लाइसेंस के धन उधार देने के कारोबार की पड़ताल करने और इस पर रोक लगाने के लिए कानून बनाने का निर्णय लिया है ताकि उन असहाय कर्जदारों को बचाया जा सके जो ‘‘शाइलॉकियन’’ रवैये वाले कर्जदाताओं के कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।
विलियम शेक्सपियर के नाटक ‘द मर्चेंट ऑफ वेनिस’ में एक साहूकार का चरित्र है जिसका नाम शाइलॉक था। शाइलॉक राशि समय पर न चुकाने पर बेहद कड़ी शर्तें रखता था।
न्यायमूर्ति सी.टी. रविकुमार और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने बॉलीवुड फिल्म निर्माता एवं निर्देशक राजकुमार संतोषी से जुड़े चेक बाउंस विवाद पर फैसला सुनाते हुए कहा कि उसने ‘‘समाज के लिए बढ़ते खतरे’’ पर ध्यान दिया है। राजकुमार संतोषी ने कथित तौर पर फिल्म ‘सारागढ़ी’ के निर्माण के लिए प्रशांत मलिक नामक व्यक्ति से पैसे उधार लिए थे।
पीठ ने कहा, ‘‘हमारे सामने ऐसे मामले आ रहे हैं, जहां इस तरह तथाकथित दोस्ताना तरीके से करोड़ों (रुपये) में लेनदेन हो रहा है। हम मुख्य रूप से उन उदाहरणों से परेशान और दुखी हैं, जहां आम आदमी इस तरह के ऋण लेता है और अंत में ऋणदाताओं के ‘शाइलॉकियन’ रवैये के कारण कंगाल हो जाता है या आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाता है।’’
संतोषी ने अधिवक्ता दुर्गा दत्त के माध्यम से दायर अपनी याचिका में दावा किया है कि जब वह फिल्म ‘सारागढ़ी’ बनाने की तैयारी कर रहे थे तो उनकी जान-पहचान वाले मलिक ने फिल्म में दो करोड़ रुपये निवेश करने की पेशकश के साथ उनसे संपर्क किया था।
उन्होंने दावा किया कि मलिक ने केवल 35 लाख रुपये का भुगतान किया और जब उन्होंने उसे निवेश के वादे के बारे में याद दिलाया तो प्रतिवादी (मलिक) ने दुर्भावनापूर्ण इरादे से अपनी वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए और अधिक निवेश करने से इनकार कर दिया।
हालांकि, मलिक ने संतोषी के दावे का खंडन किया और अदालत को बताया कि उसने अलग-अलग तारीखों और विभिन्न माध्यमों से संतोषी को दोस्ताना ऋण के रूप में 85 लाख रुपये दिए।
पीठ ने 23 जुलाई के अपने आदेश में कहा, ‘‘हम ऐसे मामलों को नियंत्रित करेंगे और उन असहाय लोगों को बचाएंगे जो ऋण लेते हैं और फिर कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। ऐसे मामलों में जहां 50 लाख रुपये या करोड़ों रुपये जैसी रकम शामिल हैं, धन उधार कानूनों के प्रावधानों का उल्लंघन करने के अलावा कर की बड़ी चोरी भी शामिल हो सकती है।’’
भाषा शफीक