स्व-नियामकीय पारिस्थितिकी का पालन करें भारतीय स्टार्टअपः अमिताभ कांत
प्रेम प्रेम अजय
- 18 Mar 2024, 06:48 PM
- Updated: 06:48 PM
नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) जी20 समूह के शेरपा अमिताभ कांत ने सोमवार को कहा कि भारतीय स्टार्टअप कंपनियों को पारदर्शिता और नैतिक आचरण के लिए स्व-नियामकीय पारिस्थितिकी तंत्र का पालन करना चाहिए क्योंकि किसी भी कीमत पर मूल्यांकन बढ़ाने की कोशिश कुशासन की राह पर ले जाती है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर भारत एक जीवंत स्टार्टअप आंदोलन खड़ा करना चाहता है तो कोई नियामकीय हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए क्योंकि ‘सरकारी विनियमन आने से नवोन्मेषण पर लगाम लगती है।’’
कांत ने यहां आयोजित ‘स्टार्टअप महाकुंभ’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में सक्षम रहा है और अगले पांच वर्षों में इसे दुनिया में स्टार्टअप का सिरमौर बनाना देश के लिए चुनौती है।
उन्होंने कहा, ‘‘स्टार्टअप को स्व-नियामकीय पारिस्थितिकी तंत्र का पालन करना चाहिए क्योंकि इससे हमारे स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में पारदर्शिता और नैतिक व्यवहार आएगा।’’
नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कांत ने स्टार्टअप को ‘राष्ट्रीय संपत्ति’ बताते हुए कहा कि उन्हें सर्वोत्तम व्यवहार को लागू करना होगा और इसी तरीके से वे निवेशकों को आकर्षित कर पाएंगे और अंततः टिकाऊ वृद्धि हासिल कर पाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘स्टार्टअप का वृद्धि पर ध्यान देना बेहद अहम है...लेकिन हर कीमत पर मूल्यांकन पर ध्यान कभी-कभी उन्हें कुशासन की ओर ले जाता है।’’
कांत ने भारत में कुछ स्टार्टअप को पेश आईं चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि स्टार्टअप कंपनियों के सभी अगुवा लोगों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उचित वित्तीय प्रबंधन और ऑडिट हो।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने स्टार्टअप को फलते-फूलते देखा है जबकि बायजू, गोमैकेनिक, हाउसिंग डॉटकॉम और ट्रेल जैसे स्टार्टअप को चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनके लिए अच्छा कॉरपोरेट प्रशासन होना ही चाहिए।’’
इसके साथ ही कांत ने कहा कि भारत में जीवंत स्टार्टअप आंदोलन बनाने के लिए कोई भी सरकारी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘कोई नियामकीय हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए क्योंकि सरकारी विनियमन नवाचार को रोकता है। हमें समझना चाहिए कि नवाचार हमेशा विनियमन से आगे रहेगा।’’
कांत ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय स्टार्टअप आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी), पेंशन कोष और उच्च संपदा वाले लोगों (एचएनआई) को इसमें निवेश करना चाहिए।
भाषा प्रेम प्रेम