हिंसा में बांग्लादेशी अभिनेता, निर्माता की मौत से स्तब्ध है कोलकाता फिल्मोद्योग
राजकुमार पवनेश
- 07 Aug 2024, 06:55 PM
- Updated: 06:55 PM
कोलकाता, सात अगस्त (भाषा) कोलकाता फिल्म उद्योग के सदस्यों ने पड़ोसी देश में अशांति के दौरान बांग्लादेशी अभिनेता शांतो खान और उनके पिता, निर्माता सलीम खान के मारे जाने पर बुधवार को दुख व्यक्त किया।
कोलकाता में फिल्मी हस्तियों ने अभिनेता-निर्माता की मौत की वजहों पर टिप्पणी करने से इंकार करते हुए कहा कि यह पड़ोसी देश का अंदरुनी मामला है। इनमें से कई बांग्लादेशी फिल्म परियोजनाओं में शांतो के साथ काम कर चुके हैं।
लोकप्रिय अभिनेता रजतभा दत्ता ने कहा,‘‘मैं यह जानकर स्तब्ध रह गया कि वह (शांतों) और उनके पिता (सलीम) मारे गए। हम नहीं जानते कि उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।... हम जैसे कलाकार जो कला और रचनात्मकता से पनपते हैं, हमेशा शांति, सौहार्द और भाईचारे की कामना करते हैं।’’
वर्ष 2022 में बांग्लादेशी फिल्म ‘बिखोव (असंतोष)’ में खान के साथ काम कर चुके दत्ता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि सेट पर इस युवा अभिनेता का सहयोगपरक एवं सम्मानजनक रवैया रहता था।
उन्होंने कहा, ‘‘(बांग्लादेश के) चांदपुर में फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मेरी जरूरतों का ख्याल रखा। होटल में भी वह मेरी जरूरतों के प्रति सजग रहते थे। मुझे नहीं पता कि कैसे और क्यों उन्हें इतनी कम उम्र में उनकी मृत्यु हुई।’’
हालांकि उन्होंने बांग्लादेश की स्थिति पर कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
शांतो ने 2019 में 'प्रेम चोर' से फिल्मी दुनिया में कदम रखा और बाद में 2021 में 'पिया रे', 2023 में 'बुबूजान' और 2024 में 'अंतो नगर' में अभिनय किया।
'पिया रे' में शांतो के साथ अभिनय कर चुकीं अभिनेत्री कौशानी मुखोपाध्याय ने कहा, ‘‘मुझे सोमवार देर रात यह बेहद परेशान करने वाली खबर मिली और तब से मैं व्यथित हूं।’’
उन्होंने याद किया कि फिल्म की चांदपुर और ढाका में शूटिंग के दौरान शांतो ने उनका एवं भारत से आए अन्य कलाकारों का भरपूर आतिथ्य सत्कार किया था।
फिल्म निर्माता राज चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘किसी की भी मौत, चाहे वह प्रदर्शनकारी छात्र की हो, पुलिसकर्मी की हो, अभिनेता की हो, निर्माता की हो या राजनीतिक कार्यकर्ता की हो, स्तब्ध करने वाली होती है। हम सभी के पास बांग्लादेश में काम करने की स्मृतियां हैं। मैं यह बात सिर्फ़ फिल्म उद्योग के हितधारक के तौर पर नहीं कह रहा हूं, बल्कि एक इंसान और भारत के नागरिक के तौर पर भी कह रहा हूं।’’
भाषा राजकुमार