अनाज आधारित एथनॉल उत्पादन के लिए राज्यसभा में उठी चावल की आपूर्ति बहाल करने की मांग
ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र माधव
- 09 Aug 2024, 02:11 PM
- Updated: 02:11 PM
नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के एक सदस्य ने शुक्रवार को राज्यसभा में सरकार से अनाज आधारित एथनॉल निर्माताओं के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के माध्यम से टूटे और क्षतिग्रस्त चावल की आपूर्ति बहाल करने का आग्रह किया, जिसे जुलाई 2023 में रोक दिया गया था।
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए बीआरएस सदस्य बी पार्थसारथी रेड्डी ने कहा कि सरकार की जैव ईंधन नीति से प्रेरित होकर पिछले चार वर्ष में 25,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ देश भर में लगभग 131 अनाज आधारित एथनॉल संयंत्र स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि हालांकि, एफसीआई से चावल की आपूर्ति बंद होने से इस उद्योग में ‘सदमे की लहर’ दौड़ गई है।
रेड्डी ने कहा, ‘‘फीडस्टॉक की कमी से पूरे उद्योग के लिए खतरा पैदा हो रहा है और 2025 तक केंद्र के महत्वाकांक्षी ई-20 लक्ष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।’’
‘फीडस्टॉक’ किसी भी अप्रसंस्कृत सामग्री को संदर्भित करता है जिसका उपयोग विनिर्माण प्रक्रिया की आपूर्ति के लिए किया जाता है।
एथनॉल एक अलग प्रकार का ईंधन है, जिसके इस्तेमाल से प्रदूषण कम होता है। यानी, इससे वाहन भी चलाया जा सकता है और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा। साल 2022 तक पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथनॉल का इस्तेमाल किया जाता था, जिसे सरकार द्वारा साल 2025 तक 20 प्रतिशत कर दिया जाएगा। इसे ही ई-20 कहा जाता है।
बीआरएस सदस्य ने कहा कि सरकार ने टूटे और क्षतिग्रस्त चावल के साथ-साथ मक्का की दरों को 21 रुपये से बढ़ाकर 29 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है।
उन्होंने कहा कि संबंधित एथनॉल मूल्य समायोजन आनुपातिक नहीं है, जिससे उद्योग अव्यावहारिक हो गया है।
रेड्डी ने सरकार से अन्य चारा उद्योगों के प्रावधानों के समान कीमत राहत कोटा के तहत मक्का आयात की अनुमति देने का आग्रह किया।
उन्होंने याद दिलाया कि 2018 से पहले, केंद्र ईंधन सम्मिश्रण के लिए पूरी तरह से शीरे से प्राप्त एथनॉल पर निर्भर था और जून 2018 में, एथनॉल उत्पादन के लिए क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई जैव ईंधन नीति पेश की गई थी।
बीआरएस नेता ने जोर देकर कहा कि सरकार को 2025 तक ई-20 लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगभग 1,000 करोड़ लीटर एथनॉल की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि 131 अनाज आधारित एथनॉल संयंत्रों में 600 करोड़ लीटर उत्पादन करने की क्षमता है, जो देश की कुल आवश्यकता का 60 प्रतिशत पूरा करते हैं।
भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र