न्यायालय ने अवमानना मामले में पूर्व जिला न्यायाधीश की याचिका पर बार नेता से जवाब मांगा
नेत्रपाल संतोष
- 09 Aug 2024, 07:56 PM
- Updated: 07:56 PM
नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली जिला अदालत की पूर्व न्यायाधीश सुजाता कोहली की उस याचिका पर बार नेता राजीव खोसला से जवाब मांगा जिसमें न्याय प्रशासन में कथित हस्तक्षेप संबंधी अवमानना मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें आरोपमुक्त किए जाने को चुनौती दी गई है।
उच्च न्यायालय ने फरवरी में दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) के पूर्व अध्यक्ष खोसला को अवमानना मामले में आरोपमुक्त कर दिया था, जो कथित तौर पर अदालती कार्यवाही में बाधा डालने को लेकर उनके खिलाफ शुरू किया गया था।
दिल्ली की तीस हजारी अदालत में एक अदालत कक्ष में 30 नवंबर, 2021 को तब अराजकता फैल गई थी जब वकील नारेबाजी करते हुए और टेबल और कुर्सियों के ऊपर खड़े होकर कोहली द्वारा दर्ज कराए गए हमले के मामले में खोसला के खिलाफ सजा पर आदेश की घोषणा का इंतजार कर रहे थे।
कोहली ने आरोप लगाया था कि अगस्त 1994 में खोसला ने उन्हें बाल पकड़कर घसीटा था। घटना के समय वह तीस हजारी कोर्ट में वकील थीं और बाद में दिल्ली न्यायपालिका में न्यायाधीश बन गईं। वह 2020 में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुईं।
बार नेता के खिलाफ अवमानना का मामला उनका समर्थन करने वाले वकीलों द्वारा की गई कथित अराजकता और बाधा के कारण उत्पन्न हुआ था जब निचली अदालत उनके खिलाफ सजा सुनाने वाली थी।
वकीलों की नारेबाजी के बीच निचली अदालत ने खोसला को दोषी ठहराया था और उन्हें निर्देश दिया था कि वह कुल 40,000 रुपये का मुआवजा दें।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कोहली की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह की दलीलों पर ध्यान दिया जिनमें खोसला को आरोपमुक्त करने के उच्च न्यायालय के फैसले पर आपत्ति जताई गई थी।
खोसला को नोटिस जारी करने के अलावा, पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को 30 नवंबर, 2021 की घटना के बारे में तत्कालीन जिला न्यायाधीश की रिपोर्ट सीलबंद कवर में देने को कहा।
इस मामले में अगली सुनवाई अब तीन सप्ताह बाद होगी।
राजीव खोसला को 29 अक्टूबर, 2021 को एक निचली अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए हमले के मामले में दोषी ठहराया था।
भाषा
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