तृकां सांसद ने शाह को पत्र लिख कर महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की
प्रीति रंजन
- 16 Aug 2024, 10:19 PM
- Updated: 10:19 PM
कोलकाता, 16 अगस्त (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को शुक्रवार को पत्र लिखकर महिलाओं के खिलाफ अपराध को रोकने के लिए एक कठोर केंद्रीय कानून बनाने की मांग की है।
रॉय ने कहा कि अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, मानसिक चिकित्सालय, शॉपिंग मॉल, सार्वजनिक परिवहन, ट्राम, सरकारी-अर्धसरकारी, निजी कार्यस्थलों और अन्य प्रतिष्ठानों सहित सार्वजनिक और निजी स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक कठोर केंद्रीय कानून बनाना चाहिए।
सुखेंदु शेखर रॉय ने कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में एक स्नातकोत्तर प्रशिक्षु डॉक्टर के बलात्कार-हत्या के मुद्दे पर महिलाओं द्वारा मध्य रात्रि में किए गए विरोध प्रदर्शन के साथ एकजुटता दिखाने के लिए 14 अगस्त को धरने पर बैठे थे।
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य और वकील ने पत्र में कहा, ''महिलाओं का साथ यौन उत्पीड़न, बलात्कार, हत्या के साथ बलात्कार की घटनाओं की कोई भी शिकायत तुरंत वैधानिक रूप से दर्ज की जानी चाहिए और निकटतम पुलिस थाने को तुरंत इसकी सूचना दी जानी चाहिए, अन्यथा संबंधित पुलिस अधिकारी/अन्य प्राधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए।''
राज्यसभा सदस्य ने शाह को लिखे पत्र में प्रत्येक जिले में कम से कम तीन त्वरित अदालतें स्थापित करने की भी मांग की, जिनमें मामलों का निपटारा छह महीने के भीतर हो तथा वास्तविक कारणों से दो बार से अधिक स्थगन न हो।
रॉय ने पत्र में मांग की कि यदि कोई जांच एजेंसी अपराध के एक महीने के भीतर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में विफल रहती है तो जिम्मेदार अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
पत्र में कहा गया, ''यदि जांच एजेंसी अपराध की घटना से एक महीने की अवधि के भीतर सभी आवश्यक जानकारी/साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहती है, तो जांच के लिए जिम्मेदार अधिकारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए और उसे पांच साल के कारावास की सजा दी जानी चाहिए।''
रॉय ने कहा, ''प्रत्येक मामले में जहां अपराध साबित हो जाए तो अपराधियों को अपराध की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर पांच-दस वर्ष के कठोर कारावास या आजीवन कारावास या मृत्युदंड दिया जाना चाहिए।''
भाषा प्रीति