एनआईआरएफ में रैंकिंग में भारी उतार-चढ़ाव, पारदर्शिता का अभाव जैसी कई विसंगतियां : अध्ययन
राजकुमार माधव दिलीप
- 20 Aug 2024, 09:06 PM
- Updated: 09:06 PM
नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) शिक्षण गुणवत्ता का प्रत्यक्ष मूल्यांकन करने के लिए तंत्र की कमी, रैंकिंग में भारी उतार-चढ़ाव, कार्यप्रणाली में अपर्याप्त पारदर्शिता और स्व-रिपोर्ट किए गए आंकड़ों पर निर्भरता, उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए शिक्षा मंत्रालय की रैंकिंग रूपरेखा की विसंगतियों में शामिल है। एक शोधपत्र में यह खुलासा किया गया है।
दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के निदेशक रह चुके तथा ‘बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलोजी एंड साइंस (बीआईटीएस)’ के कुलपति रामगोपाल राव ने यह शोधपत्र लिखा है जो ‘करंट साइंस’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है। राव ने बिट्स पिलानी के अभिषेक सिंह के साथ मिलकर यह शोध पत्र तैयार किया है।
इस माह के प्रारंभ में नौवें ‘नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ)’ की घोषणा की गयी थी।
‘एनआईआरएफ रैंकिंग में विसंगतियों का खुलासा’ नामक इस शोधपत्र में कहा गया है, ‘‘ एनआईआरएफ रैंकिंग का लक्ष्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है, लेकिन वर्तमान अध्ययन में कई विसंगतियों की पहचान की गई है, जिससे उनकी विश्वसनीयता को लेकर चिंता पैदा होती है।’’
शोध पत्र में कहा गया है,‘‘इनमें रैंकिंग में भारी उतार-चढ़ाव, गैर-पारंपरिक शोध परिणामों की उपेक्षा करते हुए ग्रंथसूची पर अत्यधिक जोर, धारणा रैंकिंग की व्यक्तिपरक प्रकृति जो पूर्वाग्रहों को जन्म देती है, क्षेत्रीय विविधता मीट्रिक में चुनौतियां, अध्यापन गुणवत्ता की अनदेखी, कार्य प्रणाली में अपर्याप्त पारदर्शिता, डेटा निष्पक्षता के बारे में प्रश्न और सीमित वैश्विक बेंचमार्किंग शामिल हैं।’’
शिक्षाविदों ने कहा कि एनआईआरएफ रैंकिंग में शिक्षण गुणवत्ता का सीधे तौर पर आकलन करने के लिए विशिष्ट तंत्र का अभाव है, कक्षा अवलोकन, छात्र मूल्यांकन और पूर्व छात्रों की प्रतिक्रिया जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गयी है।
शोधपत्र में कहा गया है, ‘‘इन मूल्यांकन विधियों की अनदेखी शिक्षण प्रभावशीलता के व्यापक मूल्यांकन में बाधा डालती है, जिससे किसी संस्थान की शैक्षिक क्षमता का अधूरा चित्रण होता है।’’
उसमें कहा गया है, ‘‘इसके अलावा, एनआईआरएफ रैंकिंग अध्यापन के व्यावहारिक आयाम को नजरअंदाज करती है, जो विभिन्न विषयों में एक महत्वपूर्ण पहलू है।’’
भाषा
राजकुमार माधव