अस्पताल में बलात्कार-हत्या मामले का राजनीतिकरण न करें, कानून अपना काम करेगा: न्यायालय
देवेंद्र नेत्रपाल
- 22 Aug 2024, 08:05 PM
- Updated: 08:05 PM
नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राजनीतिक दलों से कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के मामले का राजनीतिकरण नहीं करने को कहा। इसने यह भी कहा कि मामले में ‘‘कानून अपना काम करेगा’’।
प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा कि सभी राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि कानून अपना काम करेगा।
मेहता ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल राज्य के एक मौजूदा मंत्री ने बयान दिया है कि अगर कोई हमारी नेता (ममता बनर्जी) के खिलाफ कुछ भी बोलेगा तो उसकी उंगलियां काट दी जाएंगी।’’
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि इस तरह के बयान नहीं दिए जाने चाहिए।
उनके इस बयान पर पलटवार करते हुए सिब्बल ने कहा कि ‘‘विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि गोलियां चलाई जाएंगी’’।
पीठ में न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे। पीठ ने कहा, ‘‘मामले का राजनीतिकरण न करें। सभी राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि कानून अपना काम करेगा। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि त्वरित जांच के बाद कानून अपना काम करे।’’
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह चिकित्सकों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर चिंतित है तथा इस मुद्दे पर निर्देश जारी करेगा।
तृणमूल कांग्रेस के नेता एवं मंत्री उदयन गुहा की इस कथित टिप्पणी से विवाद खड़ा हो गया कि ‘‘आरजी कर अस्पताल की घटना के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दोषी ठहराने और उनके इस्तीफे की मांग करने वालों की उंगलियां काट दी जाएंगी’’।
वहीं, भाजपा नेता अधिकारी ने एक समाचार चैनल के साथ बातचीत में कथित तौर पर कहा था, ‘‘सोमवार तक इस्तीफा दे दीजिए या फिर आपको (ममता बनर्जी) जिम्मेदार ठहराया जाएगा या मंगलवार को गोलियां चलाई जाएंगी।’’
सरकारी अस्पताल में चिकित्सक से बलात्कार और उसकी हत्या की घटना के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में नौ अगस्त को महिला चिकित्सक का शव मिला था। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिफ्तार किया है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मामले की जांच कोलकाता पुलिस से सीबीआई को सौंपने का 13 अगस्त को आदेश दिया था। सीबीआई ने 14 अगस्त से अपनी जांच शुरू की थी।
भाषा
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