गुजरात के भरुच में शंकराचार्य मठ में आग लगाने का प्रयास, महंत को जान से मारने की धमकी
खारी मनीषा
- 22 Mar 2024, 01:50 PM
- Updated: 01:50 PM
भरुच, 22 मार्च (भाषा) गुजरात के भरुच शहर में शुक्रवार को तड़के एक व्यक्ति ने एक शंकराचार्य मठ में कथित तौर पर आग लगाने का प्रयास किया और एक पत्र में मठ के महंत को जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
भरुच जिले के पुलिस अधीक्षक मयूर चावड़ा ने बताया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और अपराधी को पकड़ने के लिए जांच शुरू की गई। उन्होंने बताया कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में आ गई है।
शंकराचार्य मठ नर्मदा नदी के तट पर नव चौकी ओवरा क्षेत्र में स्थित है।
चावड़ा ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘सुबह करीब साढ़े पांच बजे एक व्यक्ति ने आग लगाने की नीयत से मठ के दरवाजे पर कुछ सामग्री फेंकीं। उसकी यह हरकत सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है। हमने मामले की जांच के लिए कई टीमें बनाई हैं। इस संबंध में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है।’’
सीसीटीवी फुटेज में काले कपड़े और सफेद टोपी पहने एक व्यक्ति मठ के दरवाजे की ओर कुछ फेंकता दिख रहा है। फिर वह दरवाजे के पास आया और आग लगा दी।
दरवाजे में आग लगाने से पहले उसने कागज के तीन से चार टुकड़े दरवाजे की ओर फेंके। सूचना मिलने के बाद मठ परिसर पहुंचे पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि कागज में हाथ से धमकी भरा संदेश लिखा था- ‘‘गुस्ताख पीर की सजा, सर तन से जुदा’’ ।
मठ के महंत मुक्तानंद स्वामी ने बताया कि वह घटना के समय परिसर में ही मौजूद थे।
स्वामी ने संवाददाताओं को बताया कि शंकराचार्य मठ और आसपास के दो मंदिर द्वारका शारदा पीठ के अंतर्गत आते हैं। यह पीठ आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख ‘पीठ’ में से एक है।
महंत ने बताया, ‘‘जब मैं सुबह करीब पांच बजे पास के मंदिर में पूजा करने के बाद मठ लौटा तो मेरे पड़ोसी दिलीप दवे दौड़ते हुए आए और मुझे बताया कि एक व्यक्ति मठ के दरवाजे पर कुछ सामान फेंक रहा था। इसके बाद उस व्यक्ति ने दरवाजे पर आग लगा दी जिसे मैंने बुझा दिया।’’
स्वामी ने बताया कि जब वह यह देखने बाहर गए कि आग किसने लगाई थी तो वहां कोई नहीं दिखा।
स्वामी ने बताया, ‘‘जब मैंने सीसीटीवी फुटेज की जांच की तो पता चला कि एक व्यक्ति नदी के किनारे से परिसर में दाखिल हुआ और मठ तथा मंदिर की ओर कुछ सामग्री फेंकने लगा। उसने दरवाजे की ओर कागज के कुछ टुकड़े भी फेंके, जिनमें लिखा था- ‘सर तन से जुदा’।’’
भाषा खारी