2050 तक अल नीनो की दो में से एक घटना चरम स्थिति का कारण बन सकती है: अध्ययन
नोमान नेत्रपाल
- 26 Sep 2024, 04:25 PM
- Updated: 04:25 PM
नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) अगर ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन इसी तरह से जारी रहा तो 2050 तक अल नीनो की हर दो में एक घटना चरम स्थिति का कारण बन सकती है। एक नए अध्ययन में यह जानकारी दी गई है।
अल नीनो एक मौसम पैटर्न है जो भीषण गर्मी और बाढ़ जैसी चरम स्थितियों का कारण बनता है तथा समुद्र की सतह के तापमान को बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है। वहीं, ला नीनो शीत अवस्था को दर्शाता है। इन दोनों का संबंध अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) से है।
अनेक अध्ययनों ने साक्ष्य प्रदान किए हैं कि लगातार गर्म होती जलवायु अल नीनो की घटनाओं को जल्दी और तीव्रता से लाने की परिस्थितियां बनाती हैं जो मौसम की चरम घटनाओं का कारण बनती हैं।
अमेरिका के कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं सहित अन्य द्वारा किए गए इस अध्ययन में पिछले 21,000 वर्षों में अल नीनो की घटनाओं को सक्रिय करने के लिए कंप्यूटर मॉडल का उपयोग किया गया। यह वह वक्त था जब पृथ्वी अंतिम हिमयुग के चरम थी और यह धरती के सबसे ठंडे काल में से एक था।
इसमें यह पता चला है कि तब से पृथ्वी की जलवायु गर्म होने के साथ ही अल नीनो की घटनाएं जल्दी-जल्दी हुईं और तीव्र होती गईं ।
मॉडल ने यह भी अनुमान जताया है कि अगर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन वर्तमान स्तर पर जारी रहा, तो 2050 तक अल नीनो की हर दो में से एक घटना चरम स्थिति का कारण बन सकती हैं।
‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में लेखकों ने कहा कि ईएनएसओ में उच्चतम परिवर्तनशीलता ग्रीनहाउस वार्मिंग की प्रतिक्रिया में होती है तथा दो में से एक घटना चरम स्थित तक पहुंच जाती है।
कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर और प्रमुख लेखक पेड्रो डिनेज़ियो के अनुसार, अध्ययन के निष्कर्षों का अर्थ है कि लोगों को उभरने में अपेक्षाकृत कम समय मिलेगा, साथ ही जान और माल पर अधिक प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि अगर ये चरम स्थितियां जल्दी-जल्दी आएंगी तो समाज के पास अगले अल नीनो से पहले उभरने और खुद को फिर से खड़ा करने के लिए पर्याप्त वक्त नहीं होगा। डिनेज़ियो ने कहा कि इसके परिणाम विनाशकारी होंगे।
सबसे हालिया 2023-24 के अल नीनो को पिछले साल जून से लगातार 12 महीनों के दौरान वैश्विक तापमान में आई रिकॉर्ड वृद्धि से जोड़ा गया है।
भाषा
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