रोगाणुरोधी प्रतिरोध से उत्पन्न खतरे से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता: केंद्रीय मंत्री
नेत्रपाल मनीषा
- 27 Sep 2024, 02:56 PM
- Updated: 02:56 PM
नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने शुक्रवार को कहा कि रोगाणुरोधी प्रतिरोध सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है और इससे निपटने के लिए तत्काल वैश्विक सहयोग की जरूरत है।
मंत्री ने यह टिप्पणी रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) पर संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्चस्तरीय बैठक में अपने हस्तक्षेप के दौरान की।
सभा को संबोधित करते हुए पटेल ने रेखांकित किया, ‘‘एएमआर वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है जो आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में दशकों की प्रगति को कमजोर कर रहा है।’’
स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि मंत्री ने विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों में एएमआर रोकथाम रणनीतियों के तत्काल एकीकरण की मांग की, जिसमें महामारी संबंधी तैयारी, स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना और निगरानी की तुलना में रोकथाम और शमन के लिए संसाधन उपयोग पर अधिक ध्यान देने के साथ सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है।
केंद्रीय मंत्री ने अप्रैल 2017 में अपनी राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपी एएमआर) की शुरुआत के बाद से एएमआर से निपटने में भारत की महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला।
उन्होंने मानव और पशु दोनों क्षेत्रों में निगरानी नेटवर्क के विस्तार, संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण में सुधार करके अस्पताल से होने वाले संक्रमण को कम करने और मानव तथा पशु संबंधी स्वास्थ्य क्षेत्रों में रोगाणुरोधी उपयोग को बढ़ावा देने में हुई प्रगति को भी रेखांकित किया।
पटेल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि देश में स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े संक्रमण (एचएआई) की राष्ट्रव्यापी तौर पर व्यवस्थित और मानकीकृत निगरानी शुरू की गई है।
बयान के अनुसार, भारत ने अनावश्यक एंटीबायोटिक नुस्खों को कम करने और बढ़ते एएमआर से निपटने के लिए एक रोगाणुरोधी स्टीवर्डशिप (एएमएस) कार्यक्रम विकसित किया है।
भारत ने अपने अद्यतन एनएपी-एएमआर 2.0 के हिस्से के रूप में अंतर-क्षेत्रीय सहयोग को भी प्राथमिकता दी है, जिसमें प्रत्येक क्षेत्र के लिए बजटीय कार्ययोजनाएं और अच्छी तरह से परिभाषित निगरानी और मूल्यांकन तंत्र शामिल हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, रोगाणुरोधी प्रतिरोध तब होता है जब जीवाणु, विषाणु, कवक और परजीवी रोगाणुरोधी दवाओं पर प्रतिक्रिया नहीं करते हैं।
भाषा
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