गुजरात की कंपनी ऋषिकेश में ‘बीटल्स’ आश्रम को संवारेगी
सुरभि पवनेश
- 25 Oct 2024, 05:14 PM
- Updated: 05:14 PM
अहमदाबाद, 25 अक्टूबर (भाषा) गुजरात स्थित एक वास्तुकला कंपनी ऋषिकेश में ऐतिहासिक ‘चौरासी कुटिया’ आश्रम का नवीनीकरण करेगी, जहां लोकप्रिय ब्रिटिश बैंड ‘बीटल्स’ ने योगाभ्यास किया था, गीत लिखे और तैयार किये थे।
बीटल्स के चार प्रसिद्ध कलाकार, जॉन लेनन, पॉल मेकार्टनी, जॉर्ज हैरिसन और रिंगो स्टार, 1968 में ऋषिकेश शहर के पास राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के अंदर स्थित आश्रम में रुके थे।
उत्तराखंड सरकार ने आश्रम के नवीनीकरण का कार्य एचसीपी डिजाइन, प्लानिंग एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा है। इस आश्रम की स्थापना मूल रूप से महर्षि महेश योगी ने 1961 में 7.5 हेक्टेयर वन भूमि पर एक ध्यान केंद्र के रूप में की थी।
एचसीपी डिजाइन, प्लानिंग एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड का मुख्यालय अहमदाबाद शहर में है।
वास्तुकार बिमल पटेल के नेतृत्व वाली इस कंपनी ने हाल के दिनों में कुछ बड़ी परियोजनाओं को अंजाम दिया, जिनमें सेंट्रल विस्टा, नया संसद परिसर और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर शामिल हैं।
कंपनी वर्तमान में अहमदाबाद शहर में गांधी आश्रम के पुननिर्माण पर काम कर रही है।
चौरासी कुटिया आश्रम को लोकप्रियता तब मिली जब 1968 में ब्रिटिश बैंड ने यहां लगभग तीन महीने तक योग और ध्यान का अभ्यास किया। बैंड के इस प्रवास को उनके गीत लेखन के लिए सबसे अधिक रचनात्मक अवधि कहा गया और उन्होंने 30 से अधिक गीत लिखे।
कंपनी के परियोजना प्रमुख आनंद पटेल ने कहा कि 90 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से नवीनीकरण का काम 2024 के अंत तक शुरू हो जाएगा और इसे पूरा होने में डेढ़ साल लग सकता है।
पीटीआई-भाषा से बात करते हुए पटेल ने कहा, ‘‘यह उत्तराखंड सरकार की परियोजना है। जहां तक हमें पता है, केंद्र सरकार ने नवीनीकरण का यह विचार तब सामने रखा जब पिछले साल ऋषिकेश में जी-20 बैठक में भाग लेने वाले कई विदेशी प्रतिनिधियों ने इस स्थान के बारे में पूछताछ की और इसे देखने की इच्छा व्यक्त की। इसके बाद केंद्र ने उत्तराखंड सरकार से अनुरोध किया कि वह देखे कि क्या इसे विकसित किया जा सकता है या नहीं।’’
उन्होंने कहा कि चूंकि आश्रम जंगल के अंदर है, इसलिए यह ‘‘कम प्रभाव वाला पर्यटन स्थल’’ बना रहेगा, जहां न्यूनतम शोर या अन्य गतिविधियां होंगी क्योंकि शोर और गतिविधियां बढ़ने से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
पटेल ने कहा, ‘‘यह स्थान 50 वर्ष से अधिक पुराना है और हम इसके मूल स्वरूप में कोई परिवर्तन किए बिना इसकी मरम्मत करेंगे, ताकि आगंतुकों को इसके मूल स्वरूप का अंदाजा हो सके।’’
भाषा सुरभि