वायु गुणवत्ता चुनौतियों से निपटने के लिए आईआईटी-कानपुर में स्वदेशी पीएम 2.5 सेंसर पर काम जारी
अमित नेत्रपाल
- 08 Dec 2024, 04:26 PM
- Updated: 04:26 PM
(उज्मी अतहर)
नयी दिल्ली, आठ दिसंबर (भाषा) ‘ग्लोबल साउथ’ की वायु गुणवत्ता चुनौतियों से निपटने के लिए एक स्वदेशी पीएम 2.5 सेंसर विकसित किया जा रहा है। यह जानकारी आईआईटी कानपुर के कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी के डीन प्रोफेसर एस एन त्रिपाठी ने दी।
‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अकसर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है। ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं।
प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा कि इस सेंसर का विकास भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी)-कानपुर में ऐरावत रिसर्च फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है, जिसका प्रदर्शन 2025 के मध्य तक और 2026 की शुरुआत में इसे बाजार में उतारने की योजना है।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यह किफायती समाधान सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करता है, जिससे वास्तविक समय में वायु गुणवत्ता के विस्तृत आंकड़ों का संग्रह संभव हो पाता है। इस तरह के आंकड़ों से सरकारी विभागों को प्रदूषण के स्रोतों का पता लगाने और स्थानीय स्तर पर समय रहते हस्तक्षेप करने में मदद मिल सकती है।’’
त्रिपाठी ने वायु गुणवत्ता निगरानी के बुनियादी ढांचे में भारी विषमता पर प्रकाश डाला, जिसके कारण कई ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी नहीं हो पाती। उन्होंने इस अंतर को दूर करने के लिए सचल वायु गुणवत्ता सेंसर, मोबाइल रियल-टाइम सोर्स अपोर्शमेंट (आरटीएसए) लैब और ड्रोन-आधारित वर्टिकल प्रोफाइलिंग सहित कई तकनीकों का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा कि नवाचारों का उद्देश्य स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकेंद्रीकृत नीतिगत कार्रवाइयों के लिए विस्तृत और सटीक डेटा प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी में शैक्षिक पाठ्यक्रम और शोध पहलों में स्थिरता को एकीकृत करने के प्रयास जारी हैं।
स्कूल भारतीय शैक्षिक ढांचे में स्थिरता को एक केंद्रीय विषय बनाने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) तथा राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनजीईआरटी) के साथ साझेदारी का भी लाभ उठा रहा है। त्रिपाठी ने कहा, ‘‘हमने अहमदाबाद और रोहतक जैसे शहरों में सीएनजी की मांग का पूर्वानुमान लगाने और ट्रक रूटिंग को अनुकूलित करने के लिए एआई मॉडल विकसित किए हैं। ऐसे समाधानों को सरकारी एजेंसियों और अन्य शहरी संदर्भों के लिए अनुकूलित किया जा रहा है।’’
भाषा अमित