शिवसेना (उबाठा) ने मणिपुर में अब तक राष्ट्रपति शासन न लगाये जाने के फैसले पर सवाल खड़े किये
सुरेश वैभव
- 13 Dec 2024, 06:07 PM
- Updated: 06:07 PM
नयी दिल्ली, 13 दिसंबर (भाषा) शिवसेना (उबाठा) ने मणिपुर में अब तक राष्ट्रपति शासन न लगाये जाने पर सवाल खड़े करते हुए शु्क्रवार को पूछा कि क्या यदि विपक्ष शासित किसी राज्य में इस तरह की घटना होने पर भी केंद्र सरकार इसी तरह चुप रहती।
शिवसेना (उबाठा) सांसद अरविंद सावंत ने ‘संविधान की 75 वर्ष की गौरवशाली यात्रा’ विषय पर लोकसभा में चर्चा में हिस्सा लेते हुए केंद्र सरकार पर देश में अघोषित आपातकाल लगाये जाने का आरोप लगाया।
सावंत ने अपने वक्तव्य की शुरुआत बाबा साहेब आंबेडकर के उस वक्तव्य को उद्धृत करते हुए की, जिसमें उन्होंने कहा था कि संविधान भले ही कितना भी बढ़िया क्यों न हो, लेकिन उसके क्रियान्वित करने वाला सही नहीं हो तो यह बेकार है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष द्वारा संविधान की धज्जियां उड़ाने का दावा करने वाले सत्तापक्ष के कार्यकाल के दौरान देश में अघोषित आपातकाल है। उन्होंने कहा कि कोई जरूरी नहीं है कि आपातकाल लगाया ही जाए।
सावंत ने मणिपुर में महिलाओं पर हुए कथित अत्याचार और उसके बाद राज्य की स्थिति की पृष्ठभूमि में कहा कि यदि दूसरे राज्य में इसी तरह की घटना होती तो क्या राष्ट्रपति शासन लागू नहीं हुआ होता।
शिवसेना (उबाठा) सांसद ने कोलकाता उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के भाजपा में शामिल होने और निर्वाचित होकर संसद पहुंचने तथा पूर्व प्रधान न्यायाधीश को राज्यसभा में मनोनीत किये जाने का परोक्ष हवाला देते हुए पूछा कि क्या इससे संविधान की धज्जियां नहीं उड़तीं।
उन्होंने पूछा कि क्या पूर्व न्यायाधीशों के लिए कोई ‘कूलिंग’ पीरियड नहीं है, क्या आंबेडकर ने संविधान के ऐसे ही अनुपालन की परिकल्पना की थी?
उन्होंने सरकारी नौकरियों में रिक्तियों का भी उल्लेख किया।
द्रविड़ मुनेत्र कषगम के टीआर बालू ने कुछ तमिल नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्वजों ने संविधान के रूप में एक विरासत हमें सौंपी है।
माकपा के सच्चिदानंद आर ने संविधान खतरे में होने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार के कई मंत्रियों ने पहले संविधान को बदलने की बात कही थी।
समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने चर्चा में भाग लेते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया गया है।
उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर राजनीति नहीं चलेगी, आंबेडकर के संविधान को बचाने के आधार पर चलेगी।
भाषा सुरेश