विश्व फलक पर बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे भारतीय फिर भी देश ‘विकसित’ नहीं बल्कि ‘विकासशील’ : आतिशी
जितेंद्र रंजन
- 13 Dec 2024, 09:15 PM
- Updated: 09:15 PM
नयी दिल्ली, 13 दिसंबर (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने शुक्रवार को वैश्विक स्तर पर भारतीय नागरिकों की सफलता की सराहना की और पूछा कि अंतरराष्ट्रीय फलक पर देश के नागरिकों की उपलब्धियों के बावजूद भारत अभी भी एक ‘विकासशील’ देश क्यों बना हुआ है।
मुख्यमंत्री ने गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ (आईपी) विश्वविद्यालय के 25वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस विश्वविद्यालय के छात्र देश और दुनिया भर में अपना नाम बना रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “विश्वविद्यालय 40 विषयों में 190 शैक्षणिक कार्यक्रम प्रदान करता है और वर्तमान में यहां 90,000 से अधिक विद्यार्थी नामांकित हैं। यह न केवल दिल्ली का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है, बल्कि देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक भी हो सकता है।”
आतिशी ने वैश्विक स्तर पर भारतीय मूल के पेशेवरों की उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि कई प्रमुख तकनीकी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भारतीय हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय न केवल वैश्विक स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं बल्कि चिकित्सा, प्रौद्योगिकी, कला और संगीत जैसे क्षेत्रों में भी अग्रणी हैं।
आतिशी ने कहा, “भारतीयों को दुनिया भर में इतनी सफलता प्राप्त करते देखना मेरे अंदर दो तरह की भावनाएं जगाता है। सबसे पहले, मुझे बहुत गर्व महसूस होता है। दूसरा, मुझे आश्चर्य होता है कि अगर हमारे लोग इतनी सफलता प्राप्त कर सकते हैं तो हमारे देश को अभी भी विकासशील क्यों माना जाता है, विकसित क्यों नहीं।”
उन्होंने देश के ‘विकासशील’दर्जे के लिए अतीत में शिक्षा को प्राथमिकता न दिए जाने को जिम्मेदार ठहराया।
आतिशी ने कहा कि 1947 में भारत के साथ आजाद हुए देश अब विकसित हैं क्योंकि उन्होंने शिक्षा को प्राथमिकता दी।
उन्होंने 2015 से आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकाल में सरकारी विद्यालयों में आए बदलाव पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर के सरकारी स्कूल बहुत ही खराब स्थिति में थे, शौचालयों से बदबू आती थी, डेस्क और टेबल गायब थे और खिड़कियां टूटी हुई थीं।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अक्सर चुनाव या पोलियो ड्यूटी दी जाती थी, जिससे वे अपने विद्यार्थियों पर ध्यान नहीं दे पाते थे।
आतिशी ने कहा, “दिल्ली सरकार के दस वर्षों के शासनकाल में शिक्षा क्रांति के बाद सरकारी विद्यालयों में बड़ा परिवर्तन आया है और अब उनमें निजी विद्यालयों जैसी ही सुविधाएं हैं।”
भाषा जितेंद्र