लाल किला विस्फोट मामला : एनआईए ने 10 आरोपियों के खिलाफ 7,500 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया
मनीषा
- 14 May 2026, 02:14 PM
- Updated: 02:14 PM
(फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने लाल किला इलाके में कार बम विस्फोट मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ 7,500 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
पिछले वर्ष 10 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी को दहला देने वाले इस उच्च तीव्रता के विस्फोट में 11 लोगों की मौत हुई थी, कई लोग घायल हुए थे और बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।
एनआईए द्वारा जारी बयान के अनुसार, मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी (मृत) समेत सभी 10 आरोपी अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े थे, जो भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (एक्यूआईएस) का एक सहयोगी संगठन है। आरोपपत्र यहां पटियाला हाउस कोर्ट स्थित एनआईए की विशेष अदालत में दाखिल किया गया।
गृह मंत्रालय ने जून 2018 में एक्यूआईएस और उससे जुड़े सभी संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित किया था।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि एनआईए ने वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच के जरिए एक बड़े ''जिहादी षड्यंत्र'' का पर्दाफाश किया। जांच में पाया गया कि कुछ कट्टरपंथी बने चिकित्सा पेशेवरों सहित आरोपी एक्यूआईएस/अंसार गजवत-उल-हिंद की विचारधारा से प्रेरित होकर इस घातक हमले को अंजाम देने में शामिल थे।
आरोपपत्र गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967; भारतीय न्याय संहिता, 2023; विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908; शस्त्र अधिनियम, 1959; और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की संबंधित धाराओं के तहत दाखिल किया गया है।
बयान में कहा गया है कि पुलवामा निवासी डॉ. उमर उन नबी के खिलाफ आरोप समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया है, जो आत्मघाती हमले में मारा जा चुका है। वह हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय में मेडिसिन विभाग का पूर्व सहायक प्रोफेसर था।
एनआईए के अनुसार, आरोपपत्र में डॉ. नबी के अलावा आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. आदिल अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयाब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार के नाम शामिल हैं।
एनआईए के बयान के अनुसार, 2022 में श्रीनगर में हुई एक गुप्त बैठक में आरोपियों ने तुर्किये के रास्ते अफगानिस्तान जाने की नाकाम 'हिजरत' (पलायन) कोशिश के बाद अंसार गजवत-उल-हिंद संगठन का पुनर्गठन कर उसे ''अंसार गजवत-उल-हिंद अंतरिम'' नाम दिया।
बयान में कहा गया कि इस नए संगठन के बैनर तले आरोपियों ने ''ऑपरेशन हेवनली हिंद'' शुरू किया, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक रूप से स्थापित भारत सरकार को उखाड़ फेंकना और शरीयत शासन लागू करना था।
एनआईए की जांच में खुलासा हुआ कि इस अभियान के तहत आरोपियों ने नए सदस्यों की भर्ती की, अंसार गजवत-उल-हिंद की हिंसक 'जिहादी' विचारधारा का सक्रिय प्रचार किया, हथियार और गोला-बारूद जमा किए तथा बाजार में आसानी से उपलब्ध रसायनों का उपयोग कर बड़े पैमाने पर विस्फोटक तैयार किए।
एजेंसी ने कहा कि जांच में पता चला कि आरोपियों ने विभिन्न प्रकार के आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) भी तैयार किए और उनका परीक्षण किया।
आतंकवाद रोधी एजेंसी के अनुसार, विस्फोट में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक ट्राइएसीटोन ट्राइपेरॉक्साइड (टीएटीपी) था, जिसे आरोपियों ने आवश्यक रासायनिक सामग्री जुटाकर और विस्फोटक मिश्रण को परिपूर्ण बनाने के लिए प्रयोग करने के बाद गुप्त रूप से तैयार किया था।
यह आरोपपत्र जम्मू कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में फैली व्यापक जांच पर आधारित है।
बयान में कहा गया है कि इसमें 588 मौखिक गवाहियां, 395 से अधिक दस्तावेज और 200 से ज्यादा जब्त सामग्री साक्ष्य के रूप में शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस से मामला अपने हाथ में लेने वाली एनआईए ने डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के जरिए मृत आरोपी डॉ. उमर उन नबी की पहचान स्थापित की थी।
जांच के दौरान अपराध स्थल के साथ-साथ फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय और जम्मू कश्मीर में आरोपियों द्वारा बताए गए विभिन्न स्थानों से जुटाए गए साक्ष्यों की गहन फोरेंसिक जांच, आवाज विश्लेषण आदि किए गए।
एनआईए जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी एके-47 राइफल, क्रिंकोव राइफल और कारतूसों के साथ देशी पिस्तौल जैसे प्रतिबंधित हथियारों की अवैध खरीद में भी शामिल थे।
बयान के अनुसार, आरोपियों ने जम्मू कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के उद्देश्य से रॉकेट और ड्रोन से लगाए जाने वाले आईईडी का भी परीक्षण किया था।
जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने एमएमओ एनोड, इलेक्ट्रिक सर्किट और स्विच जैसे विशेष उपकरणों सहित प्रयोगशाला सामग्री विभिन्न ऑफलाइन और ऑनलाइन स्रोतों से खरीदी थी।
बयान में कहा गया कि आरोपियों की योजना देश के अन्य हिस्सों में भी अपने नेटवर्क और गतिविधियों का विस्तार करने की थी।
इस मामले में अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एनआईए उन फरार आरोपियों की तलाश में भी जुटी है, जिनकी भूमिका जांच के दौरान सामने आई है।
भाषा
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