प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड में प्रतिष्ठित बांध का दौरा किया; जल प्रबंधन में सहयोग की उम्मीद जताई
दिलीप
- 17 May 2026, 08:49 PM
- Updated: 08:49 PM
(तस्वीरों के साथ)
हेग, 17 मई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ रविवार को प्रतिष्ठित अफस्लुइटडिज्क बांध का दौरा किया।
भारत और नीदरलैंड के बीच जल प्रबंधन और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे में गहन सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने के मद्देनजर ये दौरा हुआ है।
बत्तीस किलोमीटर लंबा यह बांध और पुल बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर ध्यान केंद्रित करता है, जो नीदरलैंड के बड़े हिस्से को उत्तरी सागर से बचाता है और साथ ही मीठे पानी के भंडारण को भी संभव बनाता है।
मोदी ने दौरे के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ''जल प्रबंधन एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें नीदरलैंड ने अभूतपूर्व कार्य किया है। इससे पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय बहुत कुछ सीख सकता है।''
उन्होंने कहा, ''हम भारत में आधुनिक प्रौद्योगिकी लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसका उद्देश्य सिंचाई, बाढ़ सुरक्षा और अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क के विस्तार में सहायता करना है।''
विदेश मंत्रालय ने अफस्लुइटडिज्क बांध को ''उत्कृष्टता और नवाचार का प्रतीक'' बताते हुए जल प्रबंधन, बाढ़ सुरक्षा और मीठे पानी के भंडारण में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''इस दौरे ने गुजरात में कल्पसर परियोजना के लिए डच विशेषज्ञता के महत्व को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य खंभात की खाड़ी के पास एक मीठे पानी का जलाशय और बांध बनाना है।''
मंत्रालय ने कहा, ''इस यात्रा ने जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, जल प्रौद्योगिकी और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड सहयोग को और गहरा करने के अवसरों पर जोर दिया।''
मंत्रालय ने बयान में कहा, ''इस संबंध में, दोनों पक्षों ने कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग के लिए भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के अवसंरचना एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया।''
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने इस बात पर गौर किया कि 'हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग' में नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत द्वारा कार्यान्वयन की व्यापक क्षमता पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी के अवसर प्रदान करती है।
भाषा शफीक दिलीप
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