एलआईसी की बिक्री पेशकश को अच्छी प्रतिक्रिया, 36,400 करोड़ रुपये की अबतक की सर्वाधिक बोली
अजय
- 04 Aug 2026, 08:04 PM
- Updated: 08:04 PM
नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री को मंगलवार को संस्थागत निवेशकों से जोरदार प्रतिक्रिया मिली। निवेशकों ने इसके लिए 36,400 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं। यह किसी बिक्री पेशकश के लिए अबतक की सर्वाधिक बोली है।
एलआईसी के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के चार साल बाद अब सरकार बिक्री पेशकश (ओएफएस) के जरिए देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी में अपनी 6.5 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी बेच रही है। इस ओएफएस का आकार आगामी बड़े आईपीओ जैसे एनएसई और रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित निर्गमों के बराबर है।
सरकार ने आईपीओ के तहत एलआईसी में 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे।
ओएफएस में 2.5 प्रतिशत आधार पेशकश शामिल है, जबकि इसमें चार प्रतिशत का 'ग्रीनशू 'यानी अतिरिक्त बोली आने पर उसे रखने का विकल्प रखा गया है। इसके उपयोग से कुल बिक्री का आकार 6.5 प्रतिशत हो जाएगा, जिसमें एलआईसी के 82.22 करोड़ शेयर शामिल हैं।
संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को 94.45 करोड़ से अधिक शेयर के लिए बोली लगाई। इन बोलियों का संकेतात्मक मूल्य 383.84 रुपये प्रति शेयर रहा। इस कीमत पर बोलियों का कुल मूल्य करीब 36,400 करोड़ रुपये बैठता है।
एलआईसी ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि सरकार ने अधिक बोली आने पर उसे रखने के विकल्प का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इसके तहत करीब 50.60 करोड़ अतिरिक्त इक्विटी शेयर (निगम की कुल चुकता इक्विटी शेयर पूंजी का चार प्रतिशत) की बिक्री की जाएगी।
एलआईसी ने कहा कि पेशकश का 10 प्रतिशत यानी 8.22 करोड़ शेयर खुदरा निवेशकों के लिए उपलब्ध होंगे, जो बुधवार को बोली लगा सकेंगे।
कंपनी ने कहा, ''कट-ऑफ कीमत यानी निर्धारित अंतिम कीमत पर बोली लगाने वाले केवल खुदरा निवेशकों और कर्मचारियों को प्रति इक्विटी शेयर 10 रुपये की छूट दी जाएगी।''
निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव अरुणीश चावला ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा कि एलआईसी ओएफएस के लिए संस्थागत निवेशकों ने इसकी मूल पेशकश के मुकाबले 3.32 गुना अधिक बोली लगायी है।
उन्होंने कहा, ''यह उत्साहपूर्ण भागीदारी मजबूत निवेशक भरोसे और भारत के पूंजी बाजारों की मजबूती को बताती है।''
एलआईसी का शेयर मंगलवार को बीएसई में 7.86 प्रतिशत टूटकर 391 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 4.95 लाख करोड़ रुपये रहा।
बिक्री पेशकश के लिए 382 रुपये प्रति शेयर का न्यूनतम मूल्य तय किया गया है, जो सोमवार के बीएसई के बंद भाव 424.35 रुपये से 10 प्रतिशत कम है।
न्यूनतम कीमत पर 82.22 करोड़ से अधिक शेयर यानी 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री से सरकार को करीब 31,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
यह हिस्सेदारी बिक्री एलआईसी को बाजार नियामक सेबी की न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता की अनिवार्यता को तय समय से पहले पूरा करने में मदद करेगी। सेबी ने एलआईसी को 16 मई, 2027 तक न्यूनतम 10 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी हासिल करने का समय दिया है।
फिलहाल एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी 96.5 प्रतिशत है।
सरकार ने इससे पहले मई, 2022 में आईपीओ के जरिये एलआईसी की 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची थी। उस समय प्रति शेयर कीमत दायरा 902-949 रुपये था और इससे करीब 21,000 करोड़ रुपये जुटाए गए थे।
एलआईसी के निदेशक मंडल ने अप्रैल, 2026 में एक के बदले एक 'बोनस शेयर' जारी करने को मंजूरी दी थी।
सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक सात सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी बिक्री और भारतीय यूनिट ट्रस्ट के निर्दिष्ट उपक्रम (एसयूयूटीआई) से प्राप्त राशि के जरिये 21,082 करोड़ रुपये जुटाए हैं।
भाषा रमण अजय
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अजय
0408 2004 दिल्ली